1 जनवरी 2026 को नव वर्ष की पावन अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्थान के मुख्यालय शांतिवन में एक विशेष अपनत्व और आध्यात्मिक गरिमा के साथ आरंभ हुई। डायमंड हॉल के विशाल सभागार में आयोजित परमात्म मिलन समारोह में दिल्ली एवं आगरा ज़ोन सहित लगभग 20,000 से अधिक भाई-बहन एक परिवार की तरह एकत्र हुए। केक काटकर नव वर्ष का स्वागत किया गया, लेकिन उससे भी अधिक मिठास आपसी स्नेह, मुस्कान और शुभ भावनाओं में देखने को मिली।
नव वर्ष के साथ ही ब्रह्माकुमारी संस्थान के 110 से अधिक देशों में फैले 5700 से ज्यादा सेवा केंद्रों पर योग साधना का विशेष आध्यात्मिक क्रम आरंभ हुआ। जनवरी मास को तपस्या मास के रूप में मनाते हुए लाखों साधक प्रातः ब्रह्म मुहूर्त सवेरे 3:00 बजे से राजयोग ध्यान में बैठकर स्वयं को हल्का, सकारात्मक और शक्तिशाली बनाने का संकल्प ले रहे हैं। यह साधना केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए समर्पित है।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ जनों ने स्नेहपूर्वक सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं और संदेश दिया कि वर्ष 2026 की सच्ची शुरुआत स्वयं से हो—अपने संस्कारों में नवीनता लाकर, हर आत्मा के प्रति शुभ भावना रखकर और दिल से दुआएं देकर। उन्होंने कहा कि आने वाली परिस्थितियों का सामना करने के लिए हमारे पास दुआओं और सकारात्मक संकल्पों का भंडार होना चाहिए।
शांतिवन में उपस्थित बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने अपने-अपने संकल्प साझा किए—किसी ने योग बढ़ाने का, किसी ने व्यर्थ और नकारात्मक विचारों को छोड़ने का, तो किसी ने सभी को सुख देने और खुशी बांटने का। कई युवाओं ने कहा कि वे स्व-परिवर्तन के माध्यम से विश्व-परिवर्तन करना चाहते हैं। पूरे वातावरण में सादगी, अपनापन और ईश्वरीय अनुभूति सहज रूप से झलक रही थी।
उल्लेखनीय है कि 18 जनवरी 1969 को संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने गहन योग साधना द्वारा संपूर्णता की अवस्था प्राप्त की थी। उसी स्मृति में जनवरी माह में विशेष योग तपस्या का यह क्रम चलता है, जो आत्मा को भीतर से सशक्त और शांत बनाता है।
नव वर्ष के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों, संपादकों, एंकर एवं डिजिटल क्रिएटर्स के साथ भी आत्मीय मुलाकातें हुईं। शुभकामनाओं और संवाद के इस क्रम ने यह संदेश दिया कि सकारात्मक सोच और मानवीय मूल्यों के साथ मिलकर ही एक सुंदर भविष्य का निर्माण संभव है।
यह नव वर्ष समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव रहा—जहाँ हर आत्मा ने स्वयं को एक वैश्विक परिवार का हिस्सा महसूस किया और नए वर्ष में प्रेम, शांति और सेवा के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।































