
जब कोई साथ न दे, तब भी अपने फैसले पर कैसे क़ायम रहें?
क्या कभी आपने अपने फैसले को सही मानकर उस पर अकेले ही टिके रहने का अनुभव किया है, जबकि दूसरे लोग आपसे सहमत नहीं थे? क्या दूसरे लोगों की सहमति पाने की कोशिश में हम अपनी खुशी खो देते हैं? आइए, आज इस पर आत्मचिंतन करें।









