Brahma Kumaris

आपका मन भी एक बच्चा है

आपका मन भी एक बच्चा है
Journey

मन हमारे बच्चे जैसा है। हम अपने काम और जिम्मेदारियाँ निभाते रहते हैं, लेकिन सबसे पहले ध्यान इस अंदर के बच्चे की भलाई पर होना चाहिए। हमें इसे प्यार देना है, संभालना है और सुकून देना है। कई लोग सोचते हैं कि उनका मन उनके नियंत्रण में नहीं है, इसलिए वे दूसरों के मन को नियंत्रित करके खुद को शक्तिशाली महसूस करना चाहते हैं। लेकिन सच यह है कि हमारा मन ही एक चीज़ है जो हमारे नियंत्रण में है। थोड़ा सा ध्यान और प्यार देने से यह अंदर का बच्चा अपने आप अनुशासित हो जाता है।

  1. 1जैसे आप हमेशा अपने बच्चों से जुड़े रहते हैं, वैसे ही अपने मन से जुड़े रहें और हर कदम पर उसे सही दिशा दें। घर, परिवार, करियर और स्वास्थ्य की जिम्मेदारियाँ निभाते हुए भी अपने अंदर के बच्चे को प्राथमिकता दें।
  2. 2यह अंदर का बच्चा इसलिए नियंत्रण में नहीं रहता क्योंकि इसे सही सोचने या कितना सोचना है, यह सिखाया नहीं गया है। रोज़ ध्यान करें और अच्छे आध्यात्मिक विचार पढ़ें—इससे मन को सही विचार बनाने की शक्ति मिलती है।
  3. 3जिम्मेदारियाँ निभाते समय अगर यह बच्चा रोने लगे—यानी मन चिड़चिड़ा, गुस्से में, ईर्ष्यालु, डरा हुआ या दुखी हो जाए—तो एक मिनट के लिए रुक जाएँ और उसे शांत करें। अपने मन को सिखाएँ कि जब लोग आपके साथ सही व्यवहार न करें, तब भी आप मजबूत रहें, बीती बातों को छोड़ दें और सबके लिए अच्छा सोचें।
  4. 4इस बच्चे को प्यार से अनुशासित करें, ज़बरदस्ती या कठोरता से नहीं। जब आप अपने मन को समझ लेते हैं, तो दूसरों को समझना आसान हो जाता है। क्योंकि जब आप दूसरों से व्यवहार करते हैं, तो उनके अंदर के बच्चे से ही बात कर रहे होते हैं।

आज का अभ्यास

आज हम अपने मन को एक बच्चे की तरह समझकर उसे प्यार, ध्यान और सही दिशा देने का अभ्यास करें, जिससे वह शांत और संतुलित बन सके।

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