Brahma Kumaris

बिना किसी अपेक्षा और शर्तों के दूसरों से प्रेम करें

बिना किसी अपेक्षा और शर्तों के दूसरों से प्रेम करें
Journey

हम सभी एक-दूसरे के प्रति प्रेमपूर्ण होना चाहते हैं। प्रेम हमारा स्वभाव है, हमारी प्राकृतिक अवस्था है। लेकिन जब हम दूसरों के प्रति कोई नकारात्मक भावना उत्पन्न करते हैं, तो हमारे प्रेम का प्रवाह रुक जाता है जिससे हमारे रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

प्रेम का अर्थ है लोगों को वैसे ही स्वीकार करना जैसे वे हैं, उनकी भलाई के लिए सोचना और साथ ही उनका सम्मान करना, चाहे उनका हमारे प्रति कैसा भी व्यवहार हो।

निस्वार्थ प्रेम देना हमेशा हमारी चॉइस होती है, जिसका उनसे कोई संबंध नहीं। जब हम अपनी प्रेम की ऊर्जा के प्रति निरंतर जागरूक होते हैं, तो हम इसे जीवन के हर दृश्य और हर व्यक्ति के साथ होने वाले हर संवाद में अनुभव कर सकते हैं। आइए, इससे जुड़ी कुछ बातों को जानें:

  1. 1आध्यात्मिक ज्ञान हमें सिखाता है कि हमें दूसरों से उतना ही प्रेम करना चाहिए जितना हम स्वयं से करते हैं, क्योंकि हम सभी प्रेम का ही एक रूप हैं। चेक करें कि क्या आप लोगों के प्रति ऐसा प्रेम रेडिएट करते हैं? या फिर यह दूसरे व्यक्ति, आपकी सुविधा या आपके मूड के अनुसार बदलता रहता है?
  2. 2प्रेम हमारे लिए स्वाभाविक है। हम दावा करते हैं कि हम परिवार और दोस्तों से निस्वार्थ प्रेम करते हैं। लेकिन हर बार जब हम उनके प्रति निर्णय, आलोचना, भय, चोट, गुस्सा, तुलना, प्रतिस्पर्धा या अपेक्षाएँ जैसे नकारात्मक विचार क्रिएट करते हैं, तो हम जानबूझकर या अनजाने में अपने प्रेम के प्रवाह को रोक देते हैं।
  3. 3जब हम किसी से प्रेम करते हैं, तो इसका अर्थ है कि हम उन्हें बिना शर्त स्वीकार करते हैं। यहां तक कि जब उनके शब्द या व्यवहार हमारे प्रति सही नहीं भी होते हैं, तब भी हम उनसे अपेक्षाएं नहीं रखते हैं। आइए, हम अपने प्रेम की ऊर्जा को बनाए रखें और इसे लोगों को रेडीएट करें, क्योंकि हमारा प्रेम उन्हें हील कर सकता है और साथ ही उन्हें बदल भी सकता है।
  4. 4अपने जीवन के हर रिश्ते की नींव को प्रेम से भरपूर और मजबूत बनाएं, जो समय, व्यक्ति या परिस्थितियों के साथ न बदले। अपने आप को नियमित रूप से याद दिलाएं- मैं प्रेम से भरपूर आत्मा हूँ। सभी को निस्वार्थ प्रेम देना मेरा स्वाभाविक संस्कार है। लोगों के प्रति मेरे प्रेम की भावनाएँ उनके व्यवहार पर निर्भर नहीं करतीं। मैं सभी से निस्वार्थ प्रेम करने और उन्हें खुशियाँ देने का चुनाव करता हूँ। मैं दूसरों के लिए प्रेम का स्रोत हूँ।

आज का अभ्यास

आज मैं हर व्यक्ति को वैसे ही स्वीकार करूँ जैसा वह है। मेरा प्रेम उनके व्यवहार पर नहीं, मेरे संस्कारों की श्रेष्ठता पर आधारित रहे।

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