दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं, इस चिंता से मुक्त रहें — भाग 1

हम सभी अपने रोज़मर्रा के जीवन में परिवार, कार्यस्थल और सामाजिक जीवन में अलग-अलग लोगों से मिलते हैं। हर व्यक्ति हमारे बारे में अपनी अलग राय और धारणा रखता है। कुछ लोग हमारे बारे में अच्छा सोचते हैं, जबकि कुछ की सोच नकारात्मक भी हो सकती है, जिसे सुनना या जानना हमें अच्छा नहीं लगता। तो दूसरों की हमारे बारे में राय को लेकर होने वाली चिंता और डर से हम कैसे मुक्त हो सकते हैं? आइए, इस संदेश में समझते हैं—
- 1हर दिन स्वयं से कहें कि आप एक विशेष आत्मा और ईश्वर की सुंदर संतान हैं — सुबह उठते ही अपने लिए कुछ अच्छे और ऊँचे विचारों से दिन की शुरुआत करें। सहज रूप से अपनी प्रशंसा करें और अपने जीवन की विशेषताओं तथा उपलब्धियों को याद करें। जितना अधिक आप ऐसा करेंगे, उतना ही आप दूसरों और उनकी राय से डिटैच होते जाएँगे। आप सभी का सम्मान करेंगे, लेकिन साथ-साथ स्वयं को भी समझेंगे और सम्मान देंगे। फिर आपको इस बात की चिंता नहीं होगी कि दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं, खासकर तब जब वे आपके बारे में गलत सोच रहे हों। वहीं, अगर कोई आपकी किसी कमजोरी या ऐसे कार्य के बारे में सही बात कहता है, जिसमें आपको सुधार की आवश्यकता महसूस होती है,
तो आप उसकी राय को महत्व देंगे और स्वयं में वह बदलाव लाएँगे। - 2दिन में थोड़े-थोड़े समय के लिए अपने भीतर जाएँ और चेक करें — आजकल हमारे जीवन में एक आम बात यह है कि हम पूरे दिन बाहर की ओर देखते रहते हैं और लोगों से जुड़े रहते हैं।
अधिकांश लोग अपने अंदर झाँकने और स्वयं तथा ईश्वर से जुड़ने के लिए समय नहीं निकालते।इससे वे भावनात्मक रूप से कमजोर होते जाते हैं और यही कारण है कि लोग दूसरों की कही और अपने बारे में की गई बातों से आसानी से प्रभावित हो जाते हैं। ईश्वर हमें स्वयं से जुड़ने और प्रेम से उन्हें याद करने की प्रेरणा देते हैं। जितना अधिक हम ईश्वर से प्रेम और उनका सम्मान करते हैं, उतना ही हमारे हर कार्य से दूसरों को भी हमारे प्रति अपनापन महसूस होने लगता है। सभी हमें प्रेम, सम्मान, सहयोग और सहारा देते हैं, क्योंकि ईश्वर इस विश्व-परिवार रूपी वृक्ष के बीज हैं। जितना अधिक हम बीज रूपी ईश्वर से प्रेम और सम्मान रखते हैं, उतनी ही वह सकारात्मक वाइब्रेशन पूरे वृक्ष में फैलती है। वृक्ष का हर पत्ता, अर्थात् हर आत्मा, हमें वही प्रेम और सम्मान देने लगती है और हमारे बारे में सकारात्मक सोचती है। और अगर कभी कोई हमारे बारे में नकारात्मक सोचता भी है, तो हम अपनी सकारात्मक वाइब्रेशन से उसकी सोच को बदल सकते हैं।
(कल जारी रहेगा …)
आज का अभ्यास
आज जब किसी की राय मेरे मन को प्रभावित करे, मैं भीतर जाकर स्वयं को एक विशेष आत्मा और ईश्वर की सुंदर संतान समझूँ, फिर शांत होकर उस राय को देखूँ।
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