जहाँ प्रेम है, वहाँ दर्द क्यों? (भाग 2)

हम सभी दिव्य प्रेम का प्रतीक हैं और यह बिना किसी शर्त के दूसरों के साथ साझा किया जाना चाहिए। जीवन इसी प्रेम को साझा करने के बारे में है- अपने शरीर से प्रेम करना, खुद से प्रेम करना, दूसरों से प्रेम करना, परमात्मा से प्रेम करना, प्रकृति से प्रेम करना, अपने कार्य से प्रेम करना.... और अंततः ये प्रेम की ऊर्जा ही हमें प्यूरीफाय करती है और खुद को बदलने में हमारी मदद करती है। लेकिन यदि हम इस प्रेम को डर या पीड़ा के साथ जोड़ते हैं, तो इस शुध्द प्रेम का प्रवाह रुक जाता है। हम चिंतित होते हैं, दर्द में होते हैं और डर जाते हैं। ऐसी कमज़ोर मानसिक स्थिति में, ना तो हम सही तरीके से और न ही सही हद तक किसी की मदद कर सकते हैं। भले ही शारीरिक रूप से हम उनके लिए बहुत कुछ कर रहे होते हैं लेकिन हमारी नकारात्मक तरंगें निरंतर उस व्यक्ति तक पहुँचती रहती हैं। हम उन्हें कंट्रोल करने लगते हैं और जिससे वे महसूस करते हैं कि हम उन्हें डोमिनेट कर रहे हैं।
यदि हम खुद के जीवन को देखें तो ये पाएंगे कि, हमें सबसे अधिक दर्द अपने प्रियजनों से मिला होगा। और ऐसा अज्ञात दर्द हमें तब होता है जब अधिकार, नियंत्रण, समर्पण और निर्भरता की एनर्जी या तो हमसे उनकी ओर या उनसे हमारी ओर रेडीएट हो रही होती है। यहां ध्यान देने योग्य बात है कि इनमें से कोई भी प्योर या डिवाइन लव नहीं है। हम अपने जीवन में कुछ लोगों को एक आशीर्वाद के रूप में देखते हैं। वे हमसे प्यार करते हैं, हमें सपोर्ट करते हैं, हमारी मदद करते हैं और अनेक प्रकार से हमारी सेवा भी करते हैं, जिसके चलते हम भावनात्मक रूप से ऋणी महसूस करते हैं। लेकिन यदि किसी कारण से वे हमसे अलग हो जाते हैं, तो हम ये दोष देते हैं कि हमारा अत्यधिक प्रेम ही हमें इस अलगाव के दर्द से उबरने नहीं दे रहा है। जबकि यह सत्य नहीं है। मृत्यु या अन्य किसी कारण के चलते किसी से हमारा बिछुड़ना/ साथ छूट जाना, पूर्णतः एक कार्मिक परिणाम है। हर एक का, हमारे साथ पार्ट एक निश्चित अवधि के लिए ही है और यह हमारे उनके साथ कार्मिक अकाउंट पर निर्भर करता है। इसलिए,
हमें सही समझ के साथ एक-दूसरे को लगातार शुद्ध प्रेम की ऊर्जा को रेडीएट करते रहना चाहिए।
(कल जारी रहेगा…)
आज का अभ्यास
क्या प्रियजनों से मिला दर्द वास्तव में प्रेम का परिणाम है? समझें अधिकार, निर्भरता और नियंत्रण की ऊर्जा कैसे पीड़ा लाती है तथा शुद्ध प्रेम से कार्मिक अकाउंट संतुलित करें सदा.
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