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क्या परमात्मा के साथ आपके संबंध घनिष्ठ और मजबूत हैं?

क्या परमात्मा के साथ आपके संबंध घनिष्ठ और मजबूत हैं?
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परमात्मा शांति, प्रेम और आनंद के सागर हैं और हम उनके बच्चे उनके समान ही इन मूल गुणों वाली आत्माएं हैं। जब परमात्मा के साथ हमारा संबंध सुंदर होता है तो हम खुद को उनके इन गुणों से भरपूर कर सकते हैं। एक सुंदर रिश्ते को दो लाइन में डिफाइन किया जा सकता है- मैं आपका हूँ और आप मेरे हो, इसके साथ ही, जो कुछ मेरा है वो आपका है, और जो आपका है वो मेरा है। परमात्मा के साथ का संबंध भी इन्हीं चार लाइन पर ही आधारित है; अगर हम सच में उनके करीब हैं और उन्हें बहुत करीब से अनुभव करते हैं। आमतौर पर जब किसी से पूछा जाता है कि, आपके सबसे करीब कौन है तो बहुत से लोग कहेंगे - मेरा बच्चा, मेरा जीवनसाथी, मेरे माता-पिता, मेरे शिक्षक, मेरे भाई-बहन आदि। बहुत कम लोग कहेंगे कि, परमात्मा मेरे सबसे करीब हैं। ऐसा क्यूँ? क्या ऐसा इसलिए है कि, वह हमें इन आंखों से दिखाई नहीं देते? या हमने उनके प्रेम को करीब से नहीं महसूस किया है? या फिर क्या ऐसा इसलिए है क्यूंकि हम नहीं जानते कि उन्हें कैसे याद किया जाए? या इसलिए कि भौतिक संबंधों से जुड़ना आसान होता है?

आइए विचार करें, कि परमपिता परमात्मा के साथ एक घनिष्ठ और मजबूत रिश्ता कैसे बनाया जाए ?

1. आइए, अपने सच्चे आध्यात्मिक स्वरूप, अपने वास्तविक आध्यात्मिक घर, अपने प्राकृतिक गुणों और विश्व नाटक में अपनी भूमिका को जानें और समझें।

2. परमात्मा के नाम, उनके दिव्य स्वरूप, परमधाम, उनके गुणों और विश्व नाटक में उनकी भूमिका का ज्ञान लें और उसे गहराई से समझें।

3. तीसरा कदम है — परमात्मा के साथ अपने गहरे संबंध का अनुभव करना। यह महसूस करना कि वे ही हमारे सबसे निकट हैं। इन दोनों ज्ञान बिंदुओं के आधार पर उनके साथ सच्चे और गहरे प्रेम को अनुभव करना।

4. अगला कदम है — अपने विचार, वचन और कर्म को परमात्मा की इच्छा के अनुसार ढालना। जब हम अपना सब कुछ उन्हें समर्पित करते हैं, तो वे बदले में हमें शांति, प्रेम और आनंद से भर देते हैं। इससे उनके साथ हमारा संबंध और भी मधुर और मजबूत बनता है।

5. अंतिम कदम है — इस शांति, प्रेम और आनंद को चारों ओर फैलाना और अपने हर संबंध व हर भूमिका को परमात्मा के गुणों से रंग देना।

ब्रह्माकुमारीज संस्था इसी दिशा में ईश्वरीय ज्ञान साझा करती है, जो आपके जीवन में परमात्मा के साथ गहरा और सशक्त संबंध बनाने की कुंजी बन सकता है।

आज का अभ्यास

परमात्मा शांति, प्रेम और आनंद के सागर हैं। जब हम उनके साथ गहरा और सच्चा संबंध बनाते हैं, तब उनके दिव्य गुण हमारे जीवन में प्रकट होते हैं और हमारा मन शांति, प्रेम और आत्मिक शक्ति से भर जाता है।

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