Brahma Kumaris

लॉ ऑफ अट्रैक्शन: जैसे विचार, वैसा अनुभव

लॉ ऑफ अट्रैक्शन: जैसे विचार, वैसा अनुभव
Journey

हम कुछ ऐसे लोगों से मिल सकते हैं (यहां तक कि खुद से भी), जिन्हें प्यार और स्नेह नहीं मिलता। हालांकि वे परिवार और अपने मित्रों से स्वीकृति पाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। वे हर एक की परवाह भी करते हैं लेकिन अक्सर लोग उनकी परवाह नहीं करते। कभी-कभी ये सिर्फ नजरअन्दाज किए जाने के बारे में नहीं होता है, बल्कि वे खुद क्रोध, नफरत या अस्वीकृति जैसी विपरीत गुणों वाली एनर्जी को भी आकर्षित करते हैं। ऐसा तब होता है जब हम खुद से प्यार नहीं करते या हमारे अंदर आत्म-सम्मान की कमी होती है। जब हम ऐसे नकारात्मक वाइब्रेशन फैलाते हैं, तो दूसरों से भी प्यार और सम्मान की कमी ही आकर्षित होती है। क्योंकि हम जैसी ऊर्जा दूसरों को देते हैं, वैसी ही ऊर्जा हमें उनसे वापस मिलती है। चाहे प्यार हो, शांति हो या खुशी—यदि हम खुद को ये सब नहीं देते, तो कोई और भी हमें ये नहीं दे सकता। ये सबकुछ हमसे शुरू होता है और हमसे ही दूसरों तक पहुंचता है। ठीक ऐसा ही तब होता है जब कोई सफलता के लिए बहुत मेहनत करता है लेकिन बार-बार उसे असफलता ही मिलती है। इसका सीधा संबंध हमारी सूक्ष्म ऊर्जा की क्वालिटी के ऊपर डिपेंड करता है। एक लक्ष्य निर्धारित करने के बाद, हमें भय व संदेह के नकारात्मक विचार पैदा किए बिना, अपने जीवन की यात्रा में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। सफल होने के लिए जो भी आवश्यक है उसकी कमी की बजाय हम अक्सर अपने भय के कारण ही असफल होते हैं। भले ही किसी विशेष मोड़ पर हम असफल हो जाएं, पर ये जरूरी है कि हम अपने मन को सकारात्मक रूप से अपने लक्ष्य की तरफ निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहें। जब हमारी वाईब्रेशन पॉजिटिव होती हैं, तब हमारे लिए अधिक सम्भावनाएं खुलती जाती हैं।

हम सभी के पास आठ आध्यात्मिक शक्तियाँ हैं। मेडिटेशन और निरंतर आध्यात्मिक पढ़ाई द्वारा, हमें स्वयं को स्वीकार करने की शक्ति को बढ़ाना है। लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं ये हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है। हम स्वयं के लिए क्या सोचते हैं ये हमारे लिए मायने रखता है। आइए, अपने खुद के आत्म-सम्मान का निर्माण अपनी कोर वैल्यू के आधार पर करें, न कि अपनी उपलब्धियों या लोगों की उम्मीदों के आधार पर। इसी प्रकार हमें अपनी सामना करने की शक्ति को भी बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि हमारी एनर्जी भय और आत्म संदेह से प्रभावित न हो सके। यह शक्ति हमारे मन को पुनः साहस की ओर ले जाती है और हम जीवन के किसी भी पहलू में सफल हो सकते हैं। ऐसे दृश्यों में लॉ ऑफ अट्रैक्शन काम करता है। इस नियम का अर्थ यह नहीं है कि हमें वही मिलता है जो हम चाहते हैं, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ है कि हमें वही मिलता है जो हम होते हैं। जैसी हमारी अवस्था होती है, वैसे ही हमारे विचार और शब्द होते हैं। ये विचार ब्रह्मांड में तरंगें बनाकर फैलते हैं और फिर हमारे पास लौट आते हैं। हमारे व्यक्तित्व में हमारे संस्कार और कर्मों का खाता भी शामिल है, इसलिए हमें जो कुछ मिलता है, वह इन सब पर भी निर्भर करता है।

आज का अभ्यास

क्या हम वही आकर्षित करते हैं जो हम होते हैं? यह लेख बताता है कि विचार, ऊर्जा और आत्मिक शक्तियाँ मिलकर हमारे जीवन के अनुभव कैसे बनाती हैं।

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