परमात्मा रूपी आध्यात्मिक बीज के साथ जुड़ें

आध्यात्मिकता; परमात्मा या सुप्रीम बीइंग को एक सर्वोच्च ज्योति बिंदु, जिसे सभी आत्माएं दुनिया भर में याद करती हैं। लेकिन समयानुसार जब हम अपने मन और बुद्धि को उनसे जोड़ते हैं, तो हमें एहसास होता है कि वे सिर्फ एक बीज नहीं हैं, बल्कि एक जीवित बीज हैं, जिनका अपना एक अनुपम व्यक्तित्व है। यह व्यक्तित्व किसी से मेल नहीं खा सकता - यह आध्यात्मिक सत्य, सुंदरता, पवित्रता, उदारता, प्रेम, देने, शांति, विनम्रता, आनंद, शक्ति, मिठास आदि का व्यक्तित्व है।
परंतु यह कैसे संभव है?
हम सामान्यतः बीज को निष्क्रिय (बेजान) या सोया हुआ मानते हैं, जबकि इसमें एक पूरा पेड़ उगाने की ताकत या क्षमता होती है। परमात्मा; मानव विश्व वृक्ष के बीज हैं। जब मैं अपने आस-पास गुण देखता हूँ, अर्थात पवित्र आत्माओं को देखता हूं चाहे वह सभी मानव आत्माओं में हो, देवताओं, पैगंबरों, संतों और महान धर्मों के संस्थापकों में हो, या जानवरों या प्रकृति में, मुझे पता है कि उनमें जो कुछ भी विशेष है वह परमात्मा में मौजूद गुणों से आता है या मूल रूप से परमात्मा के व्यक्तित्व से आता है लेकिन
परमात्मा सर्वव्यापी नहीं हैं, अर्थात् वह सभी मनुष्यों या प्रकृति में या फिर दिव्य आत्माओं में मौजूद नहीं हैं (जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है)।
यह इसलिए है क्योंकि वृक्ष बीज की रचना है, जैसा बीज़ वैसा फल इसलिए वृक्ष में जो कुछ भी सकारात्मक है, वह स्रोत यानि कि बीज से आया है। लेकिन आज, शांति और दुख कम नहीं हुए हैं, बल्कि और ही बढ़ गए हैं। यदि हम भौतिक सफलता की झूठी परत के पीछे देखें तो अच्छाई केवल छोटे-छोटे हिस्सों में दिखाई देती है। तो आज के समय की जरूरत क्या है
आध्यात्मिक रूप से स्वयं को ऊंचा उठाने के लिए, मुझे यानि स्व को, रचना व पेड़ के एक भाग को, रचता व बीज; परमात्मा की सकारात्मक ऊर्जा को कैच करने की आवश्यकता है। यह ऊर्जा सूक्ष्म है, लेकिन भौतिक नहीं है, परंतु यह प्रकाश की तरह चमकदार है, और योग के द्वारा मैं उस चमक को पकड़ सकता हूं, उसे अवशोषित कर सकता हूं और उसके आध्यात्मिक आलिंगन को महसूस कर सकता हूं जो मुझे श्रेष्ठ बनाता है, पूर्ण या सम्पूर्ण बनाता है। वर्तमान समय में, इस आवश्यकता को पहचानते हुए, सर्वोच्च आत्मा अपने व्यक्तित्व की रोशनी को, शुद्ध विचार और वाइब्रेशन्स के माध्यम से पहले से अधिक चमकदार रूप में, मानव विश्व वृक्ष में चमका रहे हैं, और हमें आमंत्रित कर रहे हैं: हे प्यारे बच्चों, आओ! योग द्वारा व मेरे साथ आध्यात्मिक संबंध के माध्यम से मुझमें अंतर्निहित गुणों को अवशोषित करके और उन्हें अपना बनाकर अपना जन्मसिद्ध अधिकार; सत्यता की विरासत, को पुनः प्राप्त करो।
आज का अभ्यास
आज हम अपने मन और बुद्धि को परमात्मा से जोड़ने का अभ्यास करें और उनके गुणों को अनुभव करते हुए आत्मा को शांति, प्रेम और शक्ति से भरें।
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