Brahma Kumaris

सराहे जाने की इच्छा से मुक्त रहें (भाग 3)

सराहे जाने की इच्छा से मुक्त रहें (भाग 3)
Journey

3. हम सभी का स्वभाव या व्यक्तित्व अलग-अलग होता है और हमारे जन्मों और पुनर्जन्मों की हमारी यात्राएँ भी अलग-अलग रही हैं। इसलिए, इस समय, हम सभी को अलग-अलग तरीकों से सफलता प्राप्त होगी। आप सभी ने अनुभव किया होगा कि कोई ऐसा व्यक्ति जिसमें लोगों के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करने की कला हो, लेकिन हो सकता है वह सार्वजनिक रूप से बोलने में अच्छा न हो। दूसरी ओर, कोई व्यक्ति जो बहुत क्रिएटिव है और किसी विशेष कौशल में अच्छा है, हो सकता है वह पढ़ाई में इतना बुद्धिमान न हो। इसलिए, हम सभी की क्षमताएँ और शक्तियां अलग-अलग और अनोखी हैं। इसका मतलब यह है कि हम हमेशा अपने आसपास के लोगों को, उनके अच्छे कार्यों के लिए प्रशंसा का पात्र बनते देखेंगे। दूसरी ओर, हमें हमारे द्वारा किए गए कुछ अलग कार्यों के लिए प्रशंसा मिल सकती है, जिनमें दूसरा व्यक्ति अच्छा न हो। इसलिए, जब इसे स्वीकार करके समझ लिया जाता है, तो हर कार्य में प्रशंसा पाने की इच्छा नहीं रहेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम हर कार्य में श्रेष्ठ नहीं हो सकते। हर व्यक्ति की अपनी-अपनी विशेषताएँ और सीमाएँ होती हैं। इसलिए प्रशंसा भी अलग-अलग लोगों में बाँटी जाती है। यह संभव नहीं कि किसी एक व्यक्ति को उसके हर कार्य के लिए सराहना मिले।

4. अंत में, हम सभी जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छा कर रहे हैं क्यूँकि यही सही है। जो अच्छा है वह हमारे द्वारा, हमारे परिवार, हमारे समाज और हमारे आस-पास की दुनिया से परिभाषित होता है। इसलिए, दी गई परिभाषा का हम पालन करते हैं। लेकिन साथ ही, हमारे आस-पास के कुछ लोग नकारात्मक कार्य भी कर रहे हैं। कभी-कभी, हो सकता है कि प्रशंसा प्राप्त करने के लिए हम नकारात्मक कार्यों को अपना माध्यम बना लें। लेकिन ऐसी प्रशंसा अल्पकालिक होती है और ये हमें गहराई में संतुष्टि नहीं दे सकती क्योंकि ये झूठ की नींव पर आधारित होती है। इसलिए, कम प्रशंसा मिलना अच्छा है लेकिन सच्चाई और धर्म के मार्ग का पालन करना चाहिए। प्रशंसा पाने की इच्छा, बहुत गहरी जड़ें जमा चुका है लेकिन कभी-कभी यह हमें गलत मार्ग पर ले जाती है। जब हमें यह समझ आ जाता है कि जीवन में केवल प्रशंसा ही सब कुछ नहीं है, बल्कि अच्छे कर्म करना और अच्छा इंसान बनना ज़्यादा ज़रूरी है, तब जीवन हल्का और सहज लगने लगता है। धीरे-धीरे सराहना पाने की इच्छा हमारी जागरूकता से कम होती जाती है और एक दिन स्वतः ही समाप्त हो जाती है।

आज का अभ्यास

हर व्यक्ति की क्षमताएँ और विशेषताएँ अलग होती हैं, इसलिए हर कार्य में प्रशंसा मिलना संभव नहीं। सच्ची खुशी तब मिलती है जब हम दूसरों से तुलना छोड़कर अपने श्रेष्ठ कर्मों पर ध्यान देते हैं।

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