स्वीकृति की लत से मुक्त रहें

हम सभी अलग-अलग हैं और हर एक की जीवन-यात्रा भी अलग है। जो हम हैं और जो करते हैं, उसके लिए सराहना मिलना अच्छा लगता है। इससे लगता है कि हम सही कर रहे हैं। लेकिन जब हम बार-बार लोगों को खुश करने और उनकी स्वीकृति पाने में लग जाते हैं, तो हम दूसरों की शर्तों पर जीने लगते हैं। इससे हम अपनी असली क्षमता खो देते हैं और मन से थक जाते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि
हम अपनी इच्छाओं और अपनी क्षमता के अनुसार जीना शुरू करें।
जब हमें इस बात की चिंता नहीं रहती कि लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं, तब जीवन आसान हो जाता है।
खुद को याद दिलाएँ—मैं समझदार हूँ। मैं अपने निर्णय दूसरों की राय या स्वीकृति के आधार पर नहीं लेता हूं। यह मेरा जीवन है और जो मुझे सही लगता है, उसे चुनने के लिए मैं स्वतंत्र हूँ।
ज़रा सोचिए—क्या आप अपनी पसंद, फैसले या आदतें तब बदल लेते हैं जब आपके अपने लोग उन्हें पसंद नहीं करते? क्या लोगों की स्वीकृति आपके लिए सही होने से ज़्यादा ज़रूरी बन जाती है? इसे पहचानना आसान नहीं होता, लेकिन ऐसे व्यवहार स्वीकृति की लत को दिखाते हैं। अक्सर हम अपनों को खुश करने की कोशिश में खुद को भूल जाते हैं। लेकिन हम कौन हैं, क्या करते हैं और कैसे जीते हैं—यह फैसला हमारा होना चाहिए। किसी की स्वीकृति पाने के लिए खुद को बदलने की ज़रूरत नहीं है। आइए, अपने मूल्यों के अनुसार जीवन जिएँ और वही करें जो हमें भीतर से सही लगे। हमारे भीतर ही सभी उत्तर मौजूद हैं। बस अपने अंतर्ज्ञान की आवाज़ सुननी है और अपने विवेक का साथ देना है। जब हम अपने असली स्व के अनुसार जीते हैं और खुद को स्वीकार करते हैं, तब हमें दूसरों की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं रहती। अगर हम ऐसा नहीं करते, तो धीरे-धीरे आत्म-सम्मान कम होने लगता है। और जब हम खुद का सम्मान नहीं करते, तो दूसरों से भी सम्मान की उम्मीद नहीं कर सकते। आपको किसी की नकल करने की ज़रूरत नहीं है। अपने स्व में स्थिर रहें। लोगों की स्वीकृति की तलाश न करें, लेकिन जो प्यार और सराहना मिले, उसके लिए आभारी रहें। निःस्वार्थ भाव से सबकी परवाह करें, बिना किसी अपेक्षा के मदद करें।
प्रशंसा और आलोचना—दोनों में संतुलित रहना सीखें।
अपने मन को बाहरी स्वीकृति ढूँढने से हटाकर, अपने उद्देश्य, लक्ष्य और उन कामों पर लगाएँ जो आपके जीवन को सच में अर्थपूर्ण बनाते हैं।
आज का अभ्यास
लोगों की स्वीकृति की चाह कैसे हमें थका देती है, यह लेख समझाता है। अपने मूल्यों, आत्मसम्मान और विवेक के अनुसार जीकर स्वीकृति की लत से मुक्त रहने का मार्ग जानें।
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