विश्वास की शक्ति से मुश्किलों पर विजय प्राप्त करें (भाग 1)

हमारे वर्तमान जीवन में लगभग प्रत्येक दिन; हमारे मन में, शरीर में, रिश्तों में, धन संपत्ति, व्यक्तिगत या व्यावसायिक भूमिकाओं में कई प्रकार के उतार-चढ़ाव लाता है। आज पूरी दुनिया में एक भी मनुष्य नहीं है जो जीवन के इन सभी पहलुओं में लगातार सकारात्मकता का अनुभव कर रहा हो। ये सभी पहलू अत्यंत परिवर्तनशील हैं और हर एक वर्तमान और भविष्य में अपने साथ नकारात्मकता या नकारात्मक परिस्थितियों को जीवन में लाते हुए प्रतीत होते हैं। इसका एक बहुत ही सरल कारण यह है कि आज हम शाश्वत विश्व नाटक के एकदम अंत में खड़े हैं, अर्थात् आइरन ऐज या कलियुग के अंत में, जब प्रत्येक मनुष्य आत्मा अपने जन्म और पुनर्जन्म की यात्रा के अंतिम चरण में है। एक ऐसी यात्रा जिसमें उसने कई गलतियाँ की हैं, विशेष रूप से यात्रा के अंतिम भाग में, क्योंकि उसने देहभान में आकर कई गलत कर्म किए हैं और लगातार अपनी आध्यात्मिक शक्ति को खोया है।
जीवन के उपरोक्त सभी पहलुओं में समय-समय पर आने वाली समस्याएँ केवल प्रत्येक आत्मा द्वारा किए गए गलत कर्मों का प्रतिबिंब या कर्म फल हैं, विशेष रूप से इस विश्व नाटक के अंतिम भाग में।
यदि हम वर्तमान समय में एक ऐसे समय की उम्मीद कर रहे हैं, जब ये सभी चीजें पूरी तरह से ठीक हो जाएंगी और वे सकारात्मक रहेंगी, तो ऐसा संभव नहीं होगा, जब तक कि कलियुग समाप्त नहीं हो जाता और हम पूरी तरह से पवित्र होने के बाद सोल वर्ल्ड या मनुष्य आत्माओं के सर्वोच्च शांति के आध्यात्मिक घर में वापस नहीं लौट जाते हैं। अतः वापस लौटने से पहले, इस शुद्धिकरण के लिए हमें अपने पिछले सभी नकारात्मक या गलत कर्मों के खातों को, आध्यात्मिक सशक्तिकरण द्वारा समाप्त करना होगा, साथ ही जीवन के इन पाँच पहलुओं में समस्याओं का सामना करना होगा, जरूरी नहीं कि सभी को एक साथ, लेकिन समय - समय पर एक या एक से ज़्यादा पहलुओं में और उन्हें आसानी से, सकारात्मकता और शक्तियों से पार करना होगा। इस वास्तविकता से भागने के बजाय हमें इसे पूरी तरह से स्वीकार करना होगा। हमें सिर्फ यह कोशिश नहीं करनी है कि हमारी सोच, बोलचाल और कर्म हमेशा सकारात्मक बने रहें — क्योंकि कई बार बहुत कोशिश करने के बाद भी नकारात्मकता पूरी तरह खत्म नहीं होती। हमें इन कमियों को सुधारने की कोशिश करनी चाहिए। कभी हम सफल होंगे, लेकिन हर बार सब कुछ वैसा नहीं होगा जैसा हम चाहते हैं, या उतनी जल्दी नहीं होगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे पुराने नकारात्मक कर्म (संस्कार) धीरे-धीरे ही खत्म होते हैं, एकदम से नहीं।
(कल जारी रहेगा…)
आज का अभ्यास
आज हम अपने जीवन की हर चुनौती को कर्मों का परिणाम मानकर उसे स्वीकार करें और विश्वास की शक्ति से उसे सकारात्मकता में बदलने का अभ्यास करें।
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