व्यसन से जागृति की कहानी

अरुण प्रसाद वर्मा

अरुण प्रसाद वर्मा

2026
वेस्ट पेपर सप्लायरराउरकेला
अरुण प्रसाद वर्मा
July 23, 2024

पंद्रह वर्षों तक शराब, सिगरेट, खैनी और बीड़ी मेरे जीवन का हिस्सा बने रहे। व्यवसाय के दौरान साथियों के प्रभाव में शुरू हुई यह आदत धीरे-धीरे लत में बदल गई। मन में कई बार विचार आता था कि ये व्यसन स्वास्थ्य और जीवन-दोनों के लिए हानिकारक हैं, परंतु दृढ़ संकल्प नहीं बन पा रहा था।

जीवन ने नया मोड़ तब लिया जब मेरी पत्नी ने राजयोग का कोर्स करना शुरू किया। उनके साथ मैं भी सेवा केंद्र जाने लगा। वहाँ यह समझ मिली कि

हम श्रेष्ठ संस्कारों वाली आत्माएँ हैं-देवी-देवता कुल के हैं और व्यसन हमारे मूल स्वभाव के विपरीत हैं।

यही आत्मबोध मेरे परिवर्तन का आधार बना। तभी से मैंने सभी व्यसन त्याग दिए। आज मैं नियमित रूप से ज्ञान सुनता हूँ और राजयोग का अभ्यास करता हूँ। मेरे व्यवहार में मधुरता आई है और समाज में सम्मान भी बढ़ा है। लोग आश्चर्य से पूछते हैं-यह परिवर्तन कैसे हुआ? आज मेरा जीवन एक नई और सकारात्मक दिशा में है। मुझे सबसे ज़्यादा खुशी इस बात की है कि मेरे इस बदलाव को देखकर मेरे दो और साथियों ने भी नशे का रास्ता छोड़ दिया है। वाकई,

जब हम खुद को बदल लेते हैं, तो दुनिया बदलने लगती है।

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