Wisdom Articles for a Nasha Mukt Life

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Wisdom for a Nasha Mukt Bharat

Articles on addiction awareness and digital balance. Each opens in the Brahma Kumaris wisdom library.

Addiction

Know the Trap, Choose Freedom

Articles that help families and youth understand dependency, break denial, and take the first step toward a Nasha Mukt life.

World No Tobacco Day 2026 : From Nicotine Dependency to Inner Freedom Through the Rajyogi Lifestyle
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World No Tobacco Day 2026 : From Nicotine Dependency to Inner Freedom Through the Rajyogi Lifestyle

Freedom from tobacco is not only about quitting a habit, but about strengthening the self from within. When we fill the mind with peace, self-respect, spiritual knowledge, and connection with the Supreme, the attraction toward nicotine and other dependencies begins to reduce naturally. Let us understand how a Rajyogi lifestyle can help transform cravings into inner contentment and support a healthier society.

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आदतों और व्यसनों से मुक्ति: स्वराज्य की ओर एक यात्रा
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आदतों और व्यसनों से मुक्ति: स्वराज्य की ओर एक यात्रा

हर आदत एक संकल्प से शुरू होती है, बार-बार वही संकल्प दोहराने से बढ़ती है और धीरे-धीरे संस्कार बन जाती है। इस श्रृंखला में आइए समझें कि जागरूकता, आंतरिक प्रेरणा और राजयोग मेडिटेशन के द्वारा हर पुरानी मजबूरी को स्वयं की शक्ति में कैसे परिवर्तन किया जा सकता है।

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न्यूरो-एसोसिएटिव कंडीशनिंग: पुरानी या बुरी आदतों को कैसे परिवर्तन करें
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न्यूरो-एसोसिएटिव कंडीशनिंग: पुरानी या बुरी आदतों को कैसे परिवर्तन करें

न्यूरो-असोसिएटिव कंडीशनिंग यह दिखाती है कि मस्तिष्क संबंधों के आधार पर कैसे सीखता है: एक ट्रिगर किसी क्रिया को शुरू करता है, और मस्तिष्क उससे मिलने वाले परिणाम या संतुष्टि को याद रखता है। आइए हम समझे, कैसे न्यूरोप्लास्टिसिटी की सहायता से पुरानी आदतों को धीरे-धीरे कमजोर कर सकते हैं जिससे दिनचर्या अधिक जागरूक व उद्देश्यपूर्ण बनती है।

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क्या आप अपने फ़ोन के मालिक हैं या उसके गुलाम?
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क्या आप अपने फ़ोन के मालिक हैं या उसके गुलाम?

फ़ोन एडिक्शन अक्सर चुपचाप छोटी-छोटी रोज़मर्रा की आदतों से शुरू होता है, जैसे बार-बार फ़ोन चेक करना, बिना सोचे-समझे स्क्रॉलिंग करना। समय के साथ फ़ोन का यह अत्यधिक उपयोग हमारे फोकस, मन की शांति, नींद, रिश्तों और यहाँ तक कि बच्चों के सामने हमारे उदाहरण को भी प्रभावित कर सकता है। आइए समझें कि कुछ आसान कदम कैसे हमें फिर से नियंत्रण पाने में मदद कर सकते हैं।

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आंतरिक स्वतंत्रता का पर्व
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आंतरिक स्वतंत्रता का पर्व

सच्ची आज़ादी का मतलब है केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आंतरिक और आध्यात्मिक स्वतंत्रता। जब हम अपने विचारों और भावनाओं पर नियंत्रण पाते हैं, तब ही असली सुख मिलता है। जानें, राजयोग और आत्म-नियंत्रण से कैसे पाएं स्थायी शांति, संतोष और जीवन में स्वाभिमान।

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Digital Wellness

Screen Balance for a Clear Mind

Practical wisdom for digital wellness in homes, schools and workplaces - so technology serves you, not controls you.

सुबह की दो आदतें जो आपका जीवन बदल देंगी
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सुबह की दो आदतें जो आपका जीवन बदल देंगी

आपकी सुबह पूरे दिन का स्वर तय करती है। दिन की शुरुआत आध्यात्मिक ज्ञान और सकारात्मक जानकारी से करने पर मन शांत, शक्तिशाली और स्थिर बनता है। ये सरल आदतें आपकी आंतरिक ऊर्जा की रक्षा करती हैं और जीवन को अधिक सकारात्मकता और जागरूकता के साथ जीने में सहायता करती हैं।

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न्यूरो-एसोसिएटिव कंडीशनिंग: पुरानी या बुरी आदतों को कैसे परिवर्तन करें
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न्यूरो-एसोसिएटिव कंडीशनिंग: पुरानी या बुरी आदतों को कैसे परिवर्तन करें

न्यूरो-असोसिएटिव कंडीशनिंग यह दिखाती है कि मस्तिष्क संबंधों के आधार पर कैसे सीखता है: एक ट्रिगर किसी क्रिया को शुरू करता है, और मस्तिष्क उससे मिलने वाले परिणाम या संतुष्टि को याद रखता है। आइए हम समझे, कैसे न्यूरोप्लास्टिसिटी की सहायता से पुरानी आदतों को धीरे-धीरे कमजोर कर सकते हैं जिससे दिनचर्या अधिक जागरूक व उद्देश्यपूर्ण बनती है।

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क्या आप अपने फ़ोन के मालिक हैं या उसके गुलाम?
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क्या आप अपने फ़ोन के मालिक हैं या उसके गुलाम?

फ़ोन एडिक्शन अक्सर चुपचाप छोटी-छोटी रोज़मर्रा की आदतों से शुरू होता है, जैसे बार-बार फ़ोन चेक करना, बिना सोचे-समझे स्क्रॉलिंग करना। समय के साथ फ़ोन का यह अत्यधिक उपयोग हमारे फोकस, मन की शांति, नींद, रिश्तों और यहाँ तक कि बच्चों के सामने हमारे उदाहरण को भी प्रभावित कर सकता है। आइए समझें कि कुछ आसान कदम कैसे हमें फिर से नियंत्रण पाने में मदद कर सकते हैं।

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डिजिटल दुनिया में एकाग्रता की शक्ति: संतुलित और शांत जीवन का मार्ग
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डिजिटल दुनिया में एकाग्रता की शक्ति: संतुलित और शांत जीवन का मार्ग

डिजिटल दुनिया का शोर—लगातार नोटिफिकेशन, बार-बार मोबाइल चेक करना और एक साथ कई काम करना—धीरे-धीरे हमारी एकाग्रता और ऊर्जा को कम करता है। आइए जानें, कैसे अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद करके, कुछ समय मोबाइल से दूरी बनाकर और मन को शांत रहने का अवसर देकर हम फोकस, मानसिक स्पष्टता और कार्य क्षमता बढ़ा सकते हैं।

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ब्रेन रॉट : जब हम भूल जाते मन का मालिक कौन है?
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ब्रेन रॉट : जब हम भूल जाते मन का मालिक कौन है?

ब्रेन रॉट किसी चेतावनी के साथ नहीं आता—यह धीरे और चुपचाप शुरू होता है और मन को लगातार शोर का आदी बना देता है। समय के साथ ध्यान कमज़ोर होने लगता है, नींद बिगड़ जाती है, और साधारण काम भी भारी लगने लगते हैं। वेदांत की कहानी यह बताती है कि मन टूटा हुआ नहीं है; वह बस ज़रूरत से ज़्यादा उत्तेजित और थका हुआ है। असली सुधार तब शुरू होता है जब आप धीरे-धीरे अपने भीतर लौटते हैं, हर दिन कुछ शांत मिनट निकालकर खुद को याद दिलाते हैं: “मैं यह शोर नहीं हूँ। मैं वह हूँ जो इसे देख रहा है।”

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Brain Rot: When the Mind Forgets Who’s in Charge
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Brain Rot: When the Mind Forgets Who’s in Charge

Brain rot doesn’t arrive with a warning—it begins quietly and slowly trains the mind to the constant noise. Over time, focus weakens, sleep gets disturbed, and even simple tasks start feeling heavy. Vedant’s story shows that the mind isn’t broken; it’s simply overstimulated and tired. The real repair starts when you gently return to yourself—reducing content, and taking a few calm minutes daily to remember: “I am not the noise. I am the one watching it.”

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न्यूरोप्लास्टिसिटी और राजयोग : संस्कारों में सकारात्मक परिवर्तन की कला
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न्यूरोप्लास्टिसिटी और राजयोग : संस्कारों में सकारात्मक परिवर्तन की कला

न्यूरोप्लास्टिसिटी के अनुसार, बार-बार सोचे गए विचार और किए गए कर्म मस्तिष्क के रास्तों को मजबूत कर देते हैं। इसलिए, गहराई से बने संस्कार भी नियमित और सजग अभ्यास से बदले जा सकते हैं। राजयोग मेडिटेशन, सकारात्मक संकल्प (एफर्मेशन) और चिंतनपूर्ण लेखन (जर्नलिंग); मन में शांति, प्रेम और ज्ञान के नए संस्कार विकसित करते हैं, जबकि पुराने नकारात्मक पैटर्न धीरे-धीरे कमजोर पड़ते जाते हैं।

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Let reading become action.

After an article inspires you, take one practical step for yourself, your family or your institution.