
“जब धन, कमी या जिम्मेदारियों की चिंता हो, तब यह मेडिटेशन करें और स्वयं को परमात्मा की संतान, भरपूर और सुरक्षित अनुभव करें।”
इस मेडिटेशन के अनुभव के बाद आत्मा अपने सच्चे स्वरूप को याद करती है। यह अनुभव होता है कि मैं शरीर नहीं, एक ज्योति स्वरूप आत्मा हूँ, परमात्मा की संतान हूँ, पूर्ण हूँ, संपन्न हूँ और मेरे जीवन में कोई कमी नहीं है।
यह मेडिटेशन धन, अभाव और डर के विचारों को समाप्त करके मन में सुरक्षा, शांति और भरोसे का अनुभव कराता है। परमात्मा की दिव्य शक्ति से आत्मा स्वयं को समर्थ, भरपूर और निश्चिंत अनुभव करती है, जिससे जीवन में नए रास्ते खुलते हैं और सभी कार्य सहजता से पूर्ण होते जाते हैं।
ओम शांति। आराम से बैठें। अपने शरीर को ढीला कर दीजिए। चाहे तो आँखें बंद रखें, चाहे तो खुली रखें। एक गहरी सांस लेकर छोड़ें और रिलैक्स हो जाएँ। अपने सारे ध्यान को बाहर से हटाकर मस्तक के बीच केंद्रित करें। अपने आप को देखने क...
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