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कर्मयोग - Karma yoga - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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कर्मयोग - Karma yoga
कर्मयोग - Karma yoga
36 unique murli dates in this topic
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36 murlis in हिंदी
24/07/1969
“बिन्दु रूप की प्रैक्टिस”
31/12/1970
“अमृतवेले से परिवर्तन शक्ति का प्रयोग”
22/06/1971
“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”
01/08/1971
“स्वयं की स्टेज़ को सेट करने की विधि”
28/06/1973
“योगयुक्त होने से स्वत: युक्तियुक्त संकल्प, बोल और कर्म होंगे”
24/06/1974
“राजयोगी ही विश्व-राज्य के अधिकारी”
16/10/1975
“संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ”
06/02/1977
“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
16/06/1977
“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”
12/01/1979
“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
09/10/1981
“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”
20/01/1982
“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”
27/03/1982
“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”
13/04/1982
“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”
18/04/1982
“ऊंचे से ऊंचे ब्राह्मण कुल की लाज रखो”
27/03/1983
“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”
25/05/1983
“ब्रह्मा बाप की बच्चों से एक आशा”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
10/01/1988
“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”
19/03/1988
“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
29/12/1989
“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
10/03/1996
“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”
23/10/1999
“समय की पुकार - दाता बनो”
16/12/2000
“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”