कर्मयोग - Karma yoga
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24/07/1969“बिन्दु रूप की प्रैक्टिस”31/12/1970“अमृतवेले से परिवर्तन शक्ति का प्रयोग”22/06/1971“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”01/08/1971“स्वयं की स्टेज़ को सेट करने की विधि”28/06/1973“योगयुक्त होने से स्वत: युक्तियुक्त संकल्प, बोल और कर्म होंगे”24/06/1974“राजयोगी ही विश्व-राज्य के अधिकारी”16/10/1975“संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ”06/02/1977“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”28/04/1977“सदा सुहागिन की निशानियाँ”30/04/1977“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”16/06/1977“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”12/01/1979“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”09/10/1981“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”20/01/1982“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”27/03/1982“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”13/04/1982“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”18/04/1982“ऊंचे से ऊंचे ब्राह्मण कुल की लाज रखो”27/03/1983“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”25/05/1983“ब्रह्मा बाप की बच्चों से एक आशा”20/02/1986“उड़ती कला से सर्व का भला”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”10/01/1988“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”05/12/1989“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”29/12/1989“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”17/11/1994“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”10/03/1996“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”23/10/1999“समय की पुकार - दाता बनो”16/12/2000“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”
