स्वमान - Self Respect
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11/07/1971“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”10/05/1972“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”04/05/1973“अधिकारी और अधीन”18/06/1973“विशेष आत्माओं की विशेषता”18/07/1974“सम्पूर्ण पवित्र वृत्ति और दृष्टि से श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”23/01/1975“स्वमान की सीट पर सेट होकर कर्म करने वाला ही महान”22/09/1975“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”15/10/1975“आत्मघाती महापापी न बनकर डबल अहिंसक बनने की युक्तियाँ”18/01/1976“समर्थी दिवस के रूप में स्मृति दिवस”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”14/05/1977“स्वमान और फ़रमान”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”14/12/1978“विघ्नों से मुक्त होने की सहज युक्ति”12/11/1979“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”30/11/1979“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”11/03/1981“सफलता के दो मुख्य आधार”04/01/1982“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”06/01/1982“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”14/01/1982“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”03/04/1982“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”21/04/1983“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”18/03/1985“सन्तुष्टता”22/01/1986“बापदादा की आशा - सम्पूर्ण और सम्पन्न बनो”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”26/01/1988“संगमयुग पर नम्बरवन पूज्य बनने की अलौकिक विधि”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”20/01/1990“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”31/12/1993“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”01/02/1994“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”18/02/1994“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”13/03/1998“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”23/10/1999“समय की पुकार - दाता बनो”14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”31/12/2002“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''21/10/2005“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”15/11/2005“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''30/11/2005“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”16/11/2006“अपने स्वमान की शान में रहो और समय के महत्व को जान एवररेडी बनो”02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”31/10/2007“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”18/03/2008“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”
