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स्वमान - Self Respect - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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स्वमान - Self Respect
स्वमान - Self Respect
49 unique murli dates in this topic
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48 murlis in हिंदी
11/07/1971
“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
10/05/1972
“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”
04/05/1973
“अधिकारी और अधीन”
18/06/1973
“विशेष आत्माओं की विशेषता”
18/07/1974
“सम्पूर्ण पवित्र वृत्ति और दृष्टि से श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”
23/01/1975
“स्वमान की सीट पर सेट होकर कर्म करने वाला ही महान”
22/09/1975
“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”
15/10/1975
“आत्मघाती महापापी न बनकर डबल अहिंसक बनने की युक्तियाँ”
18/01/1976
“समर्थी दिवस के रूप में स्मृति दिवस”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
14/05/1977
“स्वमान और फ़रमान”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
14/12/1978
“विघ्नों से मुक्त होने की सहज युक्ति”
12/11/1979
“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”
30/11/1979
“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”
11/03/1981
“सफलता के दो मुख्य आधार”
04/01/1982
“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”
06/01/1982
“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”
14/01/1982
“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”
03/04/1982
“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”
21/04/1983
“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”
18/03/1985
“सन्तुष्टता”
22/01/1986
“बापदादा की आशा - सम्पूर्ण और सम्पन्न बनो”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
26/01/1988
“संगमयुग पर नम्बरवन पूज्य बनने की अलौकिक विधि”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
20/01/1990
“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
31/12/1993
“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”
01/02/1994
“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”
18/02/1994
“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”
13/03/1998
“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”
23/10/1999
“समय की पुकार - दाता बनो”
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
30/11/2003
“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''
21/10/2005
“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”
15/11/2005
“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''
30/11/2005
“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”
16/11/2006
“अपने स्वमान की शान में रहो और समय के महत्व को जान एवररेडी बनो”
02/02/2007
“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”
31/10/2007
“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”
18/03/2008
“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”