हिंदी Murlis — 1974

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23/01“अब शक्ति ‘सेना नाम' को सार्थक बनाओ”25/01“निराकार स्वरूप की स्मृति में रहने तथा आनन्द रस लेने की सहज विधि”28/01“महिमा को स्वीकार करने से रूहानी ताकत में कमी”03/02“उपराम-वृत्ति व ज्वाला रूप के दृढ़ संकल्प से विनाश का कार्य सम्पन्न करो”06/02“परखने की शक्ति से महारथी की परख”20/02“सदा सहयोगी एवं सहज योगी बनो”15/04“विघ्न-विनाशक बनकर अंगद समान माया पर विजय प्राप्त करो”24/04“त्रिमूर्ति लाइट के साक्षात्कार-मूर्त बनने की डेट फिक्स करो”28/04“स्थूल के साथ-साथ सूक्ष्म साधनों से ईश्वरीय सेवा में सफलता”02/05“अब बाप समान सर्व गुण सम्पन्न बनो”16/05“महारथीपन के लक्षण”20/05“बापदादा के दिल रूपी तख्त पर विराजमान बच्चे ही खुशनसीब हैं”23/05“हद की आकर्षणों या विभूतियों से परे रहने वाला ही सच्चा वैष्णव”27/05“विश्व-कल्याण के निमित्त बनी आत्माओं के वचन भी सदा कल्याणकारी”30/05“रूहानी सेवा में बाप के सदा सहयोगी और एवररेडी बनो”18/06“लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो”21/06“महान् पद की बुकिंग के लिये महीन रूप से चेकिंग आवश्यक”24/06“राजयोगी ही विश्व-राज्य के अधिकारी”26/06“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”30/06“अव्यक्त स्थिति में स्थित होने से पुरुषार्थ की गति में तीव्रता”30/06“रूहानी सेना का मुख्य लॉ”04/07“स्व-स्थिति की श्रेष्ठता से व्यर्थ संकल्पों की हलचल समाप्त”08/07“मास्टर नॉलेजफुल व सर्व-शक्तिवान् विभिन्न प्रकार की क्यू से मुक्त”11/07“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”14/07“बाप समान सफलता-मूर्त बनने का साधन - सर्व के प्रति शुभ भावना”18/07“सम्पूर्ण पवित्र वृत्ति और दृष्टि से श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”13/09“मुरब्बी बच्चे बन अपनी स्टेज को योग-युक्त व युक्ति-युक्त बनाओ”15/09“पुरुषार्थ का अन्तिम लक्ष्य है अव्यक्त फरिश्ता-पन”05/12“व्यर्थ संकल्पों को समर्थ बनाने से काल पर विजय”24/12“एक बार सहयोग देना अर्थात् अन्त तक सहयोग लेना”27/12“योगी भव और पवित्र भव द्वारा वरदानों की प्राप्ति”

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