हिंदी Murlis — 1975
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09/01“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”16/01“ज्वाला रूप अवस्था”18/01“साक्षात्कार मूर्त और फरिश्ता मूर्त बनने का निमन्त्रण”23/01“स्वमान की सीट पर सेट होकर कर्म करने वाला ही महान”29/01“परखने की शक्ति के प्रयोग से सफलता”30/01“सेकण्ड में व्यक्त से अव्यक्त होने की स्पीड”01/02“ईश्वर के साथ का और लगन की अग्नि का अनुभव”02/02“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”04/02“ज्ञान को स्वयं में समाने से ही अनमोल मोती और अमोघ शक्ति की प्राप्ति”05/02“पवित्रता - प्रत्यक्षता की पूर्वगामिनी है और पर्सनैलिटी की जननी”07/02“सन्तुष्टता ही सम्पूर्णता की निशानी है”08/02“निश्चय रूपी आसन पर अचल स्थिति”09/02“आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा विश्व-परिवर्तन कैसे?”10/02“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”11/02“माया से युद्ध करने वाले पाण्डवों के लिए धारणायें”02/08“विदेशों में ईश्वरीय सेवा का महत्व”03/08“शिव शक्ति व पाण्डव सेना को तैयार होने के लिए सावधानी”29/08“अब विधि की स्टेज पार कर सिद्धि-स्वरूप बनना है (जन्माष्टमी पर)”01/09“समीप और समान, महीन और महान”02/09“दिल रूपी तख्त-नशीन ही सतयुगी विश्व के राज्य का अधिकारी”05/09“फरिश्ता स्वरूप की स्थिति”06/09“तीन कम्बाइन्ड स्वरूप”09/09“ग्लानि को गायन समझकर रहमदिल बनो”10/09“नॉलेजफुल और पावरफुल आत्मा ही सक्सेसफुल”13/09“विश्व-परिवर्तन ही ब्राह्मण जीवन का विशेष कर्तव्य है”14/09“अकाल तख्त-नशीन और महाकाल-मूर्त बन समेटने की शक्ति का प्रयोग करो”18/09“माया के चक्करों से परे, स्वदर्शन चक्रधारी ही भविष्य में छत्रधारी”19/09“शक्तियों एवं पाण्डवों की विशेषतायें”20/09“शक्ति होते हुए भी जीवन में सफलता और सन्तुष्टता क्यों नहीं?”21/09“फरिश्ता अर्थात जिसका एक बाप के सिवाए अन्य आत्माओं से कोई रिश्ता नहीं”22/09“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”27/09“बेहद का वैरागी, त्यागी और सेवाधारी ही विश्व-महाराजन्”30/09“सारे कल्प में विशेष पार्ट बजाने वाली श्रेष्ठ आत्माओं की विशेषतायें”01/10“एकान्त, एकाग्रता और दृढ़-संकल्प से सिद्धि की प्राप्ति”03/10“विशाल रूप से सेवा करने के लिए विशाल बुद्धि बनो”04/10“अब दृढ़ संकल्प की तीली से कमज़ोरियों के रावण को जलाओ”07/10“सर्व अधिकार और बेहद के वैराग्य वाला ही राजऋषि”08/10“मास्टर ज्ञान-स्वरूप बनने की प्रेरणा”11/10“अन्त:वाहक अर्थात् अव्यक्त फरिश्ते रूप द्वारा सैर”12/10“कम्पलेन्ट समाप्त कर कम्पलीट बनने की प्रेरणा”15/10“आत्मघाती महापापी न बनकर डबल अहिंसक बनने की युक्तियाँ”16/10“संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ”19/10“वृक्षपति द्वारा कल्प-वृक्ष की दुर्दशा का आंखों देखा हाल”20/10“परहेज द्वारा संगमयुग के सर्व सुखों की अनुभूति”21/10“बेहद की वैराग्य वृत्ति ही विश्व परिवर्तन का आधार”23/10“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”24/10“हरेक ब्रह्मा-मुखवंशी ब्राह्मण चेतन शालिग्राम का मन्दिर है”25/10“बेहद की शिक्षिका समझ वैराग्य वृत्ति को धारण करो”26/10“विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म”27/10“क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन से पुरुषार्थ में ढीलापन”31/10“महारथी बच्चों की मुख्य विशेषतायें”06/12“याद में समा जाना अर्थात् लवलीन होना”08/12“बच्चे की विभिन्न स्टेजेस”09/12“महावीर अर्थात् विशेष आत्माओं की विशेषताएं”
