दिनांक 25 अक्तूबर 2025 को जगदम्बा भवन में सिंधी समाज के लिए एक विशेष सिंधी स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर 250 से अधिक सिंधी समाज के भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर वातावरण को आध्यात्मिकता और सौहार्द से भर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर माउंट आबू से पधारी वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी शीलू दीदी ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने अमूल्य विचार साझा करते हुए कहा कि सिंधी समाज केवल व्यापार और संस्कृति में ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता में भी अत्यंत समृद्ध है। जब आत्मा अपनी शक्ति को पहचान लेती है, तब जीवन सहज, सशक्त और शांतिमय बन जाता है। यही ब्रह्माकुमारीज़ का मूल संदेश है –आत्म-स्वरूप की पहचान और परमात्मा से पुनः संबंध।
जगदम्बा भवन की निदेशिका ब्रह्माकुमारी सुनंदा बहन ने सभी को गहन राजयोग ध्यान का अभ्यास कराया, जिससे उपस्थित जनों ने शांति, प्रेम और आध्यात्मिक ऊर्जा का सुंदर अनुभव किया।
कार्यक्रम में आ. इंदिरा पूनावाला (कवयित्री व लेखिका), आ. जवाहर कोटवानी (प्रेसिडेंट - प्रियदर्शिनी सोशल ग्रुप) तथा मिनल ठाकुर (ट्रस्टी - विमला-जीवन झूलेलाल मंदिर) ने अपने शुभ विचार साझा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा, मूल्य एवं आंतरिक शक्ति प्रदान करते हैं।
ब्रह्माकुमारी आकृति अडवाणी ने ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ने के अपने अनुभव साझा किए और बताया कि राजयोग के अभ्यास ने कैसे उनके जीवन को आंतरिक स्थिरता और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा सांस्कृतिक नाट्य प्रस्तुति – वाह रे सिंधी जिसे जगदम्बा भवन की सांस्कृतिक टीम ने स्वयं लिखा और निर्देशित किया था। इस नाटक के माध्यम से सिंधी संस्कृति की गरिमा, परंपराएँ और जीवन मूल्यों का सुंदर चित्रण किया गया, जिसे दर्शकों ने अत्यंत सराहा। नाटक के पश्चात सिंधी गीतों पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियाँ हुईं, जिनमें सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने भाग लिया।
ब्रह्माकुमारी काव्या द्वारा प्रस्तुत नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। ब्रह्माकुमार तरुण भाई ने कार्यक्रम के उद्देश्य और ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक संदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आत्म-जागृति और समाजिक एकता को सशक्त करते हैं।
मंच संचालन ब्रह्माकुमारी सिमरन बहन और ब्रह्माकुमार कपिल भाई ने सौहार्दपूर्ण शैली में किया। कार्यक्रम का समापन गहन ध्यान सत्र के साथ हुआ, जिसने सभी को शांति, प्रेम और दिव्यता का अनुभव कराया।
यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव था, बल्कि आत्म-जागृति और आंतरिक शांति का अनुपम अवसर भी सिद्ध हुआ।




























