11 March 2026 को ब्रह्माकुमारीज के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन में संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी हृदय मोहिनी (गुलजार दादी) जी की पांचवीं पुण्यतिथि श्रद्धा और स्मृति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शांतिवन का पूरा वातावरण दादी जी की यादों से भावुक और आध्यात्मिक अनुभूति से भर गया।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पदाधिकारियों और ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्यों ने अव्यक्त लोक स्थित समाधि स्थल पर पहुंचकर दादी जी को पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें श्रद्धा सुमन समर्पित किए। इसके बाद देश-विदेश से आए हजारों भाई-बहनों ने कतारबद्ध होकर दादी जी के जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनके आध्यात्मिक योगदान को स्मरण किया।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि दादी हृदय मोहिनी जी का जीवन त्याग, तपस्या, सरलता और प्रभु प्रेम का अद्भुत उदाहरण था। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से राजयोग, आत्मिक शुद्धता और परमात्मा से गहरे संबंध का संदेश पूरी दुनिया में फैलाया। उनकी मधुर वाणी, निर्मल स्वभाव और समर्पित सेवा भावना ने लाखों लोगों के जीवन को प्रेरित किया।
दादी जी का जन्म 1 जुलाई 1929 को हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर था और छोटी आयु में ही उन्हें दिव्य अनुभव होने लगे थे। बाद में वे ब्रह्माकुमारी संस्था के ईश्वरीय यज्ञ में समर्पित हो गईं और अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा तथा आध्यात्मिक जागृति के लिए समर्पित कर दिया।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि दादी जी ने लंबे समय तक अव्यक्त बापदादा के संदेशों की माध्यम (ट्रांस मेसेंजर) के रूप में सेवा की और दुनिया भर के लाखों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उनके जीवन का मुख्य संदेश था – “हर बात में बस बाबा को याद करो और अपने जीवन को पवित्र और श्रेष्ठ बनाओ।”
इस अवसर पर सभी ने संकल्प लिया कि वे दादी जी के बताए प्रेम, शांति, पवित्रता और सेवा के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करेंगे। शांतिवन में आयोजित यह स्मृति कार्यक्रम दादी जी के दिव्य जीवन और उनकी अमर शिक्षाओं को समर्पित रहा।































