रेडियो मधुबन द्वारा सामुदायिक सेवाओं के 15 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सेवा वर्ष 2025-26 के दौरान की गई विविध आध्यात्मिक, सामाजिक एवं सशक्तिकरण पहलों की एक प्रेरणादायक झलक प्रस्तुत की गई। इस अवधि में रेडियो मधुबन ने भारत के विभिन्न रेडियो स्टेशनों जैसे ऑल इंडिया रेडियो, कमर्शियल रेडियो तथा सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के साथ अपने आध्यात्मिक कार्यक्रमों एवं बाबा के गीतों को साझा कर आध्यात्मिक संदेश का व्यापक प्रसार किया।

“हिंसा को नो” अभियान के अंतर्गत 384 जागरूकता बैठकों का आयोजन किया गया तथा 20 हितधारकों जैसे डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों आदि के साथ महत्वपूर्ण चर्चाएं संपन्न हुईं। 150 से अधिक रेडियो प्रसारणों के माध्यम से घरेलू हिंसा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई गई, जिसमें 65 महिलाओं को परिस्थितिनुसार कानूनी सहयोग भी प्रदान किया गया। 432 एपिसोड्स के माध्यम से 12,158 लोगों को आध्यात्मिक जागरूकता एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।


सामुदायिक कल्याण के अंतर्गत 10,500 से अधिक लोगों को कंबल, 10,500 से अधिक बच्चों को स्टेशनरी, 25 बच्चों को वस्त्र वितरित किए गए तथा “स्वयंशक्ति” पहल के माध्यम से 15 महिलाओं को स्वरोजगार हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की गई। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 100 महिलाओं को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं नेत्र प्रशिक्षण की सुविधा दी गई। “स्वतंत्र स्वर” कार्यक्रम के माध्यम से नशामुक्त परिवार के अधिकार के प्रति जागरूकता लाई गई तथा महिलाओं के लिए रचनात्मक खेलों का आयोजन किया गया।

रेडियो मधुबन के वार्षिक उत्सव पर नियमित श्रोताओं को सम्मानित किया गया एवं पांच महिलाओं को नया व्यवसाय प्रारंभ करने हेतु सहयोग दिया गया। हैदराबाद में आयोजित यूनेस्को कार्यशाला में आदिवासी भाषाओं के संरक्षण पर चर्चा की गई तथा यूनेस्को एवं ICRW के सहयोग से “Changing Mentalities” परियोजना में देश के नौ अन्य रेडियो स्टेशनों के साथ सहभागिता की गई।

ग्लोबल समिट के दौरान विशिष्ट अतिथियों के लगभग 60 साक्षात्कार लिए गए तथा लगभग 70 मारवाड़ी एवं हिंदी गीतों का निर्माण किया गया। “नई दुनिया” कार्यक्रम के 100 एपिसोड्स में जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद किया गया। युवा मंच के अंतर्गत 40 करियर मार्गदर्शन सत्र एवं साइबर सुरक्षा कार्यशालाएं आयोजित की गईं।

ब्रह्मा बाबा के जीवन पर आधारित पुस्तक का रेडियो नाट्य रूपांतरण कर 30 एपिसोड्स तैयार किए गए, जो स्पॉटिफाई एवं यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। दादी रतन मोहिनी जी की आध्यात्मिक विरासत पर आधारित नए कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया। “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

ऑनलाइन कार्यक्रम “बातें मुलाकातें” के अंतर्गत दो वर्षों में देश-विदेश के 800 प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साक्षात्कार रिकॉर्ड एवं प्रसारित किए गए। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सहयोग से दिल्ली, पंजाब एवं राजस्थान में 18 साइबर एवं मोबाइल सुरक्षा कार्यशालाएं आयोजित की गईं। आदिवासी युवाओं के लिए 5 धनुर्विद्या प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 250 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।

रेडियो मंजीरा 90.8 एफएम को “Webs Community Radio Content Challenge Awards 2025” में “Cultural Preservation” श्रेणी में ब्रॉन्ज अवॉर्ड प्राप्त हुआ। “विचिका मुचतल्लू” कार्यक्रम के माध्यम से तेलंगाना की लोकभाषा एवं संस्कृति को प्रोत्साहन मिला। ब्रह्माकुमारी सुमंगला दीदी जी को “Women Icon Award 2026” से सम्मानित किया गया।

रेडियो मंजीरा का “जीवन ज्योति” कार्यक्रम दिव्यांगजनों के जीवन अनुभवों को समाज तक पहुंचाकर प्रेरणा प्रदान कर रहा है। पुणेरी आवास 107.8 एफएम ने “मेक इन इंडिया” से जुड़े उद्यमियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को मंच प्रदान किया। सेंट जेवियर्स कॉलेज के विद्यार्थियों को रेडियो के साथ “माइंड स्पा” एवं “3D मेडिटेशन” का अनुभव कराया गया।

रेडियो साबरमती 89.6 एफएम ने महिला सशक्तिकरण, “वोकल फॉर लोकल” तथा “गो ग्रीन” अभियानों के माध्यम से सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा दिया। GBPS Expo 2025 में भाग लेकर मूल्य-आधारित प्रसारण की शक्ति का प्रदर्शन किया गया तथा “ऊंची सोच, ऊंचा जीवन” प्रशिक्षण द्वारा दृष्टिबाधित व्यक्तियों में आत्मविश्वास का विकास किया गया।

इंदौर स्थित रेडियो सरगम 90.8 एफएम ने अपनी 7 वर्षों की सफल यात्रा पूर्ण की। विभिन्न माध्यमों जैसे ग्लोबल हॉस्पिटल, गॉडली स्टूडियो, अवेकनिंग टीवी, मधुबन न्यूज़, पीस ऑफ माइंड आदि के लिए विभिन्न भाषाओं में 200 से अधिक वॉइस ओवर सेवाएं प्रदान की गईं।

इन सभी प्रयासों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि रेडियो मधुबन एवं उससे जुड़े सभी रेडियो स्टेशनों ने रेडियो को केवल सूचना का माध्यम न बनाकर, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति, सशक्तिकरण एवं सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया है।
आइए, हम सभी मिलकर एक जागरूक, सशक्त एवं सकारात्मक समाज के निर्माण में अपनी सहभागिता निभाएं। सुनते रहिए, मुस्कुराते रहिए।






















