मम्मा-बाबा, दादियाँ एवं सभी आदरणीय वरिष्ठ दीदियों और वरिष्ठ भाइयों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, ShivShakti Leadership Approach (SSLA) के अंतर्गत भारत एवं नेपाल क्षेत्र में महिलाओं के लिए अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक आयोजित सेवाओं की एक प्रेरणादायक झलक प्रस्तुत की जा रही है।
इस सेवा अवधि में “Transformative Women’s Leadership – The ShivShakti Approach” के माध्यम से नारी को उसकी आंतरिक शिवशक्ति से जोड़ने, आत्मबल, करुणा, सहयोगात्मकता एवं निमित्त भाव के साथ नेतृत्व करने हेतु प्रेरित किया गया। यह प्रयास स्व-परिवर्तन से समाज परिवर्तन की सशक्त नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा।
वर्षभर विभिन्न महत्वपूर्ण अवसरों जैसे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस, वर्ल्ड फूड सेफ्टी डे, राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस एवं नववर्ष पर अनेक सेवाएँ आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों में “सदा शिवशक्ति बने रहें... चाहे कुछ भी हो जाए”, “Link with Trust, Live with Unity, Lead with Peace” तथा “शिवशक्ति ऊर्जा सुरक्षा कवच” जैसे विषयों पर गहन एवं अनुभवात्मक कार्यशालाएँ आयोजित की गईं।
मार्च 2026 में GGRC, अहमदाबाद (इंद्रप्रस्थ रिट्रीट सेंटर) में 65 टीम सदस्यों के लिए आदरणीय सुदेश दीदी जी के पावन सानिध्य में त्रिदिवसीय रिट्रीट का सफल आयोजन हुआ, जिसमें आदरणीय नेहा दीदी एवं नंदा दीदी का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। इस रिट्रीट में प्रतिभागियों को शिवशक्ति स्वमान की अनुभूति कराते हुए, अनुभव आधारित सेवा करने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
इसके अतिरिक्त विभिन्न स्थानों जैसे राजकोट, सिकंदराबाद, नडियाद, बेलगावी एवं बेंगलुरु में एक-दिवसीय अनुभवात्मक रिट्रीट आयोजित किए गए। साथ ही उदयपुर, कोटा, गोवा, सतारा, पालूस, चिक्कमगलुरु सहित अनेक स्थानों पर दो घंटे की 20 से अधिक कार्यशालाओं का आयोजन हुआ।
इन सभी सेवाओं में 2500 से अधिक अग्रणी महिलाओं ने भाग लिया, जिनमें सरकारी अधिकारी, ऑल इंडिया महिला संगठन की अध्यक्षाएँ, डॉक्टर, शिक्षाविद, वकील एवं कला, संस्कृति एवं खेल क्षेत्र की विशिष्ट महिलाएँ शामिल रहीं।
प्रतिभागियों के अनुभव अत्यंत प्रेरणादायक रहे—किसी ने आंतरिक शक्ति से डिप्रेशन से उबरने का अनुभव साझा किया, तो किसी ने कठिन परिस्थितियों को शांति एवं प्रेम से संभालना सीखा। कई प्रतिभागियों ने यह अनुभव किया कि सच्चा नेतृत्व पद से नहीं, बल्कि आंतरिक गुणों और शक्ति से आता है।
इस सेवा वर्ष में एक विशेष सृजनात्मक पहल के रूप में “शक्तियों के नाम शिवबाबा का प्रेम-पत्र” प्रस्तुत किया गया, जिससे प्रतिभागियों ने परमात्मा के साथ गहरा आत्मीय संबंध अनुभव किया। यह पहल आदरणीय निर्वैर भाईसाहब की स्मृति को समर्पित रही। साथ ही “मैं शिवशक्ति हूँ” विषय पर एक सुंदर गीत एवं मल्टीपर्पज़ कार्ड जैसी रचनात्मक प्रस्तुतियों ने प्रतिभागियों को आत्म-अभिव्यक्ति एवं सकारात्मक संकल्पों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह सेवाएँ केवल कार्यक्रम नहीं थीं, बल्कि नारी में शिवशक्ति स्वमान की अनुभूति कराने का एक सशक्त आध्यात्मिक अभियान थीं, जिनमें बिना लेक्चर के अनुभवात्मक एवं सहभागितापूर्ण विधियों के माध्यम से आंतरिक शक्तियों को जागृत किया गया।
अंत में, जिन भी सेवाकेंद्रों ने इन सेवाओं के लिए अवसर प्रदान किया, उनके प्रति कोटि-कोटि आभार। यही शुभकामना है कि आगे भी ऐसे दिव्य अवसर प्राप्त होते रहें और हम सभी मिलकर मम्मा-बाबा द्वारा दिए गए शिवशक्ति स्वमान को अनुभव करते हुए साक्षात शिवशक्ति स्वरूप बनकर बाबा को प्रत्यक्ष करने के इस महान कार्य को निरंतर आगे बढ़ाते रहें।
























