कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग द्वारा “स्वर्णिम दुनिया की पुनः स्थापना” अर्थात आत्मा और प्रकृति को उनके मूल सतोप्रधान स्वरूप में स्थापित करने के परम लक्ष्य को व्यवहारिक रूप देने हेतु निरंतर सेवा कार्य किए जा रहे हैं। किसानों और ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के लिए प्रभाग द्वारा विविध रचनात्मक कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है।

गत वर्ष देशभर में 4,481 कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें किसान सम्मेलन, सरपंच सम्मेलन, पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियान तथा योगिक गृह वाटिका स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम सम्मिलित रहे। इन प्रयासों के अंतर्गत 14,540 वृक्षों का रोपण किया गया तथा 8,46,514 लोगों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ।

ज्ञान सरोवर, माउंट आबू में “सनातन कृषि संस्कृति द्वारा ग्राम स्वराज” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त ओआरसी गुड़गांव, धमतरी, बीदर, मोहाली, मेहसाना, राजकोट, नागपुर, जगदलपुर, लातूर, कटक, वडोदरा, गोधरा, बेंगलुरु, रतलाम सहित नेपाल के जनकपुर में वृहद किसान महासम्मेलनों का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

सिकंदराबाद, रत्नागिरी, खेरालू, राजकोट, कटक, औराद एवं आबू तपोवन में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। दुर्ग, सूरत एवं लखनऊ में अधिकारियों के सम्मेलन भी संपन्न हुए। वसंत राव नायक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ (परभणी) एवं डॉ. बाला साहेब सावंत कोकण कृषि विद्यापीठ के साथ योगिक खेती पर शोध कार्य हेतु एमओयू हस्ताक्षरित किए गए।


राज ऋषि गोकुल ग्राम प्रकल्प के अंतर्गत राजकोट, जाहोता, शाहपुर, गांधीनगर सहित अनेक स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। साथ ही जम्मू, गोंदिया, प्रयागराज (माघ मेला), कोल्हापुर, मधुबनी आदि स्थानों पर सरकार के सहयोग से वृहद योगिक कृषि प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें देश के कृषि मंत्री, विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक एवं अधिकारीगण सक्रिय रूप से सहभागी बने।

उत्तर प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, तेलंगाना एवं महाराष्ट्र सहित अनेक राज्य सरकारों द्वारा प्रभाग की सेवाओं को निरंतर समर्थन प्राप्त हो रहा है। कई राज्यों द्वारा अधिकारियों, कर्मचारियों एवं किसानों को सरकारी सहयोग से प्राकृतिक योगिक खेती प्रशिक्षण हेतु तपोवन भेजा जा रहा है।

प्राकृतिक योगिक खेती के माध्यम से इस वर्ष 250 टन से अधिक विषमुक्त जैविक आलू का उत्पादन कर यज्ञ सेवा में अर्पित किया गया, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सेवा वर्ष 2025–26 के अंतर्गत प्रभाग द्वारा निम्न प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं—
आध्यात्मिकता द्वारा सशक्त किसान एवं समृद्ध ग्राम विषय पर पूरे देश में 90 किसान सम्मेलन
- प्रत्येक सेवा केंद्र द्वारा 90-90 गांवों में सेवा कार्यक्रम
- प्रत्येक केंद्र द्वारा 90-90 वृक्षारोपण अभियान
- 15 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के अंतर्गत 900 विशेष कार्यक्रम
- पर्यावरण दिवस पर योगिक गृह वाटिका अभियान का विस्तार
- पराली न जलाने हेतु उत्तर प्रदेश, पंजाब एवं हरियाणा में व्यापक जन-जागरण अभियान
- “मेरा गांव बने महान” विषय पर राज ऋषि गोकुल ग्राम प्रकल्प के अंतर्गत कार्यक्रम

कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों, आदिवासी समुदाय एवं अधिकारियों हेतु विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
प्रभाग का यह विश्वास है कि “देयर इज़ नो कल्चर विदाउट एग्रीकल्चर” अर्थात कृषि के बिना संस्कृति का अस्तित्व संभव नहीं है। इसी भावना के साथ आध्यात्मिकता आधारित सतयुगी संस्कृति की पुनः स्थापना के लक्ष्य की दिशा में सेवा योजनाएँ निरंतर आगे बढ़ रही हैं।

सभी के सहयोग से यह परम लक्ष्य सहज रूप से प्राप्त किया जा सकेगा।















