18 जून 2026 को मध्य प्रदेश के बैतूल में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित विशाल आदिवासी महासम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता कर कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में माननीय राष्ट्रपति जी ने कहा कि
आदिवासी समाज की जीवनशैली सहज रूप से आध्यात्मिक मूल्यों और प्रकृति के निकट होती है। वर्तमान तनावपूर्ण और युद्धग्रस्त विश्व परिस्थितियों में ऐसे आध्यात्मिक एवं सामाजिक जागरण से जुड़े सम्मेलनों की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान, आत्मसम्मान तथा आध्यात्मिक सशक्तिकरण के लिए ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए संस्था को हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद दिया।
राष्ट्रपति जी ने कहा कि
बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों में सकारात्मक चेतना जागृत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा ब्रह्माकुमारीज़ के इस प्रयास से समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह महासम्मेलन जनजातीय समाज को राष्ट्रीय प्रगति का सशक्त भागीदार बनाने हेतु प्रभावी कार्ययोजनाओं के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की राज्यपाल मंगूबाई पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि
ब्रह्माकुमारी संस्थान सदैव जनजातीय समुदाय की सेवा के लिए तत्पर रहता है और इसके लिए संस्था बधाई की पात्र है।

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने कहा कि
आदिवासी समाज भारत की प्राचीन गौरवशाली विरासत का प्रतीक है तथा उसका विकास ही राष्ट्र का विकास है। उन्होंने आध्यात्मिक सशक्तिकरण को जनजातीय विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।

इस अवसर पर भोपाल जोन की अतिरिक्त जोनल इंचार्ज बीके शैलजा दीदी तथा बैतूल सेवा केंद्र की प्रभारी बीके मंजू बहन ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया तथा सभी को राजयोग ध्यान सीखकर जीवन को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में बीके नाथमल, बीके लीना सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के उत्थान एवं विकास पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसका माननीय राष्ट्रपति जी ने अवलोकन किया। साथ ही जनजातीय संस्कृति पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। आदिवासी समाज की एकता, सेवा भावना तथा प्रकृति संरक्षण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी कार्यक्रम में विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

यह महासम्मेलन आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक जागरण तथा जनजातीय अस्मिता के सम्मान का एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी संगम सिद्ध हुआ, जिसने समाज में सकारात्मक परिवर्तन और आत्मिक सशक्तिकरण का प्रभावशाली संदेश प्रसारित किया।
























