24 नवम्बर 2025
हैदराबाद के शांति सरोवर रिट्रीट सेंटर का वातावरण आज सुबह कुछ अलग ही था—जैसे हवा में ही शांति और पवित्रता घुल गई हो। देश-विदेश से आए संत-महात्माओं और अध्यात्म-सेवियों की उपस्थिति ने साधु सम्मेलन को एक अद्भुत और दिव्य रूप दे दिया। पूरे तपोवन परिसर में आध्यात्मिक उर्जा और सौहार्द की ऐसी लहर फैली, जिसने हर हृदय को गहराई से स्पर्श किया।
सम्मेलन की शुरुआत वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बी. के. अंजलि के सौम्य और स्वागतपूर्ण शब्दों से हुई। उनका विनम्र संबोधन सभी संतों के चेहरे पर सहज मुस्कान ले आया। इसके पश्चात कर्नाटक के सिरसी से पधारीं गीता विदुषी बी. के. वीणा ने भारतीय साधु-संत परंपरा की महानता को अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी तरीके से समझाया। उनका यह विचार उपस्थित सभी को भीतर तक छू गया कि—जब मनुष्य स्वयं को समझ लेता है, तभी परमपिता परमात्मा की असली पहचान कर पाता है। राजयोग के महत्व पर उनके अनुभवपूर्ण शब्दों ने सभा में आध्यात्मिक चेतना को और प्रखर कर दिया।
राज्य मानव अधिकार प्रकोष्ठ के सचिव श्री हरि पनमवार ने भी प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि आज के समय में समाज को जोड़ने, हिंसा को मिटाने और मन को शांत करने की वास्तविक शक्ति आध्यात्मिकता में ही निहित है।
इसके बाद मंच पर आए हनुमान उपासक एवं रामायण धर्माचार्य डॉ. श्रीनिवास स्वामी, शांति सरोवर की निर्देशिका बी. के. कुलदीप, महंत योगी प्रशांत दास महाराज और श्री श्री केदारानंद स्वामी जी। उनके विचारों ने यह बात और स्पष्ट की कि हम देवी-देवताओं की भक्ति तो करते हैं, परंतु परम स्रोत—शिव बाबा—को जानने से ही जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है। उन्होंने आग्रह किया कि राजयोग को अपनाकर हम अपने जीवन को गुणवान बना सकते हैं और भारतभूमि को पुनः दिव्य तथा स्वर्णिम स्वरूप दे सकते हैं।
कार्यक्रम का समापन सभी साधु-संतों के आशीर्वचनों और शांति संदेश के साथ हुआ। उपस्थित लोगों में एक नई जागरूकता, नया संकल्प और समाज को आध्यात्मिकता की राह पर अग्रसर करने की प्रेरणा स्पष्ट दिख रही थी।































