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जगदम्बा भवन, पुणे में ब्रह्माकुमारीज का प्रेरणादायक आयोजन – ‘Divine Parenting’ से मिला मूल्यों से भरे पालन-पोषण का मंत्र

जगदम्बा भवन, पुणे में ब्रह्माकुमारीज का प्रेरणादायक आयोजन – ‘Divine Parenting’ से मिला मूल्यों से भरे पालन-पोषण का मंत्र
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पुणे के पिसोली स्थित जगदम्बा भवन में दिनांक 27 अप्रैल 2025 को राष्ट्रीय माता-पिता दिवस के उपलक्ष्य में ‘Divine Parenting’ नामक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन उन माता-पिताओं को समर्पित था, जो अपने बच्चों का पालन-पोषण केवल शारीरिक और बौद्धिक स्तर तक सीमित न रखकर, आत्मिक और नैतिक विकास की दिशा में भी प्रयासरत हैं। इस सत्र में लगभग 70 से अधिक माता-पिता ने सहभागिता की

कार्यक्रम का शुभारंभ मधुर ओम शांति ध्वनि से हुआ, जिसके पश्चात् जगदम्बा भवन की संचालिका बी.के. सुनंदा दीदी ने प्रेरक विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो बच्चे केवल माता-पिता के पुत्र या पुत्रियाँ नहीं, बल्कि स्वतंत्र आत्माएँ हैं जो अपने कर्म अनुसार इस घर में आई हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे हमारे ‘स्वामित्व’ में नहीं, बल्कि परमात्मा की संतान हैं, और माता-पिता केवल माध्यम हैं। संस्कार शब्दों से नहीं, बल्कि आचरण से दिए जाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से बल दिया कि जब माता-पिता के बीच प्रेम, एकता और संवाद होता है, तभी बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अंत में, बी.के. सुनंदा दीदी ने सभी को राजयोग ध्यान की गहन अनुभूति कराई।

इसके पश्चात् बी.के. गणेश ने डिजिटल वेलनेस विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि आज के युग में मोबाइल, इंटरनेट और तकनीकी साधनों के अत्यधिक उपयोग से माता-पिता और बच्चों के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर परिवार को Tech-Free Family Time सुनिश्चित करना चाहिए, जिसमें सभी सदस्य मिलकर ध्यान, संवाद और रचनात्मक गतिविधियाँ करें।

बी.के. सुप्रिया ने जॉयफुल पेरेंटिंग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रसन्न और आत्म-संतुष्ट माता-पिता ही अपने बच्चों के जीवन में सच्चे मूल्यों का संचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल आज्ञा नहीं, बल्कि प्रेम, संवाद और आध्यात्मिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। माता-पिता बच्चों को आकार नहीं देते, वे उन्हें दिशा देते हैं। यदि माता-पिता स्वयं शांति और प्रसन्नता में रहते हैं, तो वही तरंगें बच्चों के जीवन को भी प्रभावित करती हैं।

वरिष्ठ राजयोगी भ्राता दशरथ भाई ने अपने आशीर्वचन में कहा कि बच्चे ईश्वर के बीज हैं, और माता-पिता माली हैं। जैसा वातावरण, खाद-पानी आप देंगे, वैसा ही वृक्ष बनेगा।

सत्र के समापन पर अनेक माता-पिता ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस आयोजन से उन्हें पालन-पोषण के आध्यात्मिक पहलू को गहराई से समझने का अवसर मिला और अब वे अपने दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेते हैं।

अंततः ‘Divine Parenting’ कार्यक्रम एक प्रेरणादायक आयोजन के रूप में संपन्न हुआ, जिसने हर माता-पिता को यह स्मरण कराया कि बच्चों का पालन-पोषण ईश्वरीय सेवा का कार्य है। यदि इसे आध्यात्मिक समझ और आत्म-जागरूकता के साथ किया जाए, तो आने वाली पीढ़ी न केवल संस्कारवान बल्कि आत्म-निर्भर और शांतिप्रिय बन सकती है।

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