आदरणीय बी.के. बृजमोहन भाई साहब की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर मधुबन में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न धर्मों के प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं, वरिष्ठ ब्रह्माकुमारी बहनों और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 9 वर्षीय कुमारी हंसी की प्रेरणादायी प्रस्तुति रही। उन्होंने अपने संबोधन में भाई साहब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी शिक्षाओं को याद किया। उन्होंने कहा कि भाई साहब ने हमें परमात्मा से जुड़ने और सभी को उनसे जोड़ने की प्रेरणा दी।
कुमारी हंसी ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ अर्थात संपूर्ण विश्व एक परिवार है का संदेश देते हुए कहा कि सभी धर्मों की मूल शिक्षा परमात्मा की एकता और आपसी प्रेम है। उन्होंने भगवद्गीता, कुरान शरीफ और गुरु ग्रंथ साहिब के संदर्भ देते हुए समझाया कि परम सत्य एक है और हम सभी का परमपिता परमात्मा एक ही है।
उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज़ में
सहज राजयोग के माध्यम से परमात्मा से संबंध जोड़ने की शिक्षा दी जाती है। राजयोग से हमें शांति, शक्ति और प्रेम का अनुभव होता है। उन्होंने विभिन्न धर्मों की तुलना सुंदर फूलों के गुलदस्ते से करते हुए कहा कि फूल अलग-अलग हैं, लेकिन उनकी सुगंध एक है।
अपने संबोधन के अंत में कुमारी हंसी ने भाई साहब की स्मृति में एक भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। गीत के माध्यम से उन्होंने उनकी शिक्षाओं और यादों को सदैव अपने हृदय में बनाए रखने का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति से प्रभावित होकर उपस्थित सभी लोगों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर विभिन्न धर्मों के प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं ने कुमारी हंसी को आशीर्वाद और शुभकामनाएँ दीं। महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी ने उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया। बौद्ध आचार्य और फादर एम. डी. थॉमस ने आशीर्वाद दिया। आदरणीय राजयोगिनी जयन्ती दीदी ने उन्हें स्नेह-चिह्न भेंट किया। महामंडलेश्वर गोस्वामी जी ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा फिरोज अहमद बाग जी ने पुष्प भेंट कर उनका उत्साह बढ़ाया।
कुमारी हंसी की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि आध्यात्मिक ज्ञान और श्रेष्ठ संस्कार बचपन से ही जीवन को सुंदर बना सकते हैं। कार्यक्रम ने सभी को प्रेम, शांति, आपसी सम्मान और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर सभी ने भाई साहब की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने और परमात्मा की याद से विश्व में एकता एवं शांति स्थापित करने का संकल्प लिया।




























