24–26 April 2026 को ब्रह्माकुमारीज़ के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय साधु-संत महासम्मेलन का भव्य एवं सफल समापन हुआ। यह महत्वपूर्ण आयोजन रजत रश्मियां अभियान के अंतर्गत संपन्न हुआ, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों से आए अनेक साधु-संत, महंत एवं आध्यात्मिक विचारक सम्मिलित हुए।
इस महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक जागृति, पवित्रता का महत्व और आपसी शांति व एकता के संदेश को सुदृढ़ करना रहा। पूरे तीन दिनों तक चले इस आयोजन में विभिन्न सत्रों के माध्यम से गहन आध्यात्मिक चिंतन, अनुभव साझा करना और समाज निर्माण पर सार्थक चर्चा की गई।
हरिद्वार से पधारे स्वामी प्रबोधानंद जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि
भारत की आध्यात्मिक परंपरा विशेष है, जहाँ गृहस्थ जीवन भी त्याग, सेवा और तपस्या की भावना से जुड़ा हुआ है।
स्वामी शिव स्वरूपानंद जी
ने जीवन में पवित्रता को मूल आधार बताते हुए कहा कि इसके बिना सच्ची उन्नति संभव नहीं है।
महंत डॉ. नानक दास जी ने
सभी धर्मों के सार को शांति और एकता बताते हुए धर्मों के बीच सामंजस्य को आवश्यक बताया। जगदीश वेदी जी महाराज ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मानव जीवन में सुख और शांति का आधार धर्म और श्रेष्ठ चरित्र ही है।
स्वामी निर्मल दास जी ने
आत्म अवलोकन को जीवन परिवर्तन की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि स्वयं के भीतर झांकने से ही वास्तविक सुधार संभव है।
ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से राजयोगिनी सुदेश दीदी ने कहा,
“पवित्रता ही जीवन की सच्ची सुंदरता है और हमारा लक्ष्य है कि हर घर को आध्यात्मिकता और शांति का केंद्र बनाया जाए।”
राजयोगिनी आशा दीदी ने स्पष्ट किया कि
विश्व का नवीन निर्माण केवल बाहरी विज्ञान से नहीं, बल्कि योगबल और आध्यात्मिक शक्ति से ही संभव है।
माउंट आबू से पधारी राजयोगिनी उषा दीदी ने
श्रेष्ठ चरित्र को सुखमय और शांतिपूर्ण जीवन की नींव बताया और इसे समाज परिवर्तन का आधार कहा।
कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से उन पवित्र युगल मूर्त जोड़ों को सम्मानित किया गया, जो गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी ईश्वरीय मर्यादाओं और आध्यात्मिक मूल्यों का पालन कर समाज के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
तीन दिवसीय इस आयोजन में विभिन्न आध्यात्मिक सत्रों के दौरान लगभग 1000 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति रही। पूरे ओम शांति रिट्रीट सेंटर परिसर में एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का वातावरण अनुभव किया गया, जिसे उपस्थित संतों ने “मायके जैसा आत्मीय अनुभव” बताया।
कार्यक्रम में बीके हंसी द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया और वातावरण को और अधिक आनंदमय बना दिया। पूरे आयोजन का मंच संचालन राजयोगिनी मनोरमा दीदी एवं बीके हुसैन द्वारा सुचारू रूप से किया गया।
यह महासम्मेलन समाज में पवित्रता, एकता और आध्यात्मिक जागृति का संदेश फैलाने में अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुआ।





























