गुरुग्राम स्थित ब्रह्माकुमारीज़ ओम शांति रिट्रीट सेंटर (ORC) में रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में मातृशक्ति के सम्मान में विशेष अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में आध्यात्मिक ज्ञान एवं राजयोग के मार्ग पर 10 वर्षों से अधिक समय से निरंतर अग्रसर 300 महिलाओं को अभिनंदन पत्र, पटका एवं पुष्प भेंट कर भावपूर्ण सम्मान प्रदान किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए ओआरसी की निदेशिका बी.के. आशा दीदी ने कहा कि
ब्रह्माकुमारीज़ के इतिहास में दादियों की दृढ़ता, सहनशक्ति और मातृशक्ति की महानता एक जीवंत प्रेरणा है। उन्होंने मातृशक्ति के त्याग, तपस्या और सेवाभाव को संस्थान की विशेष शक्ति बताया।
दिल्ली एवं हरिनगर सेवा केंद्रों की निदेशिका बी.के. शुक्ला दीदी ने
माताओं को समाज का प्रथम गुरु बताते हुए कहा कि परिवार और समाज के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं दिल्ली शक्ति नगर से पधारी बी.के. चक्रधारी दीदी ने माताओं की निस्वार्थ सेवा एवं आध्यात्मिक लगन की सराहना की।
उन्होंने माताओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि
प्राप्त सम्मान को अपनी आध्यात्मिक इन्वेस्टमेंट समझकर पुरुषार्थ में और तीव्रता लानी चाहिए, ताकि सतयुगी संस्कारों से युक्त श्रेष्ठ समाज की स्थापना शीघ्र हो सके। उन्होंने गृहस्थ जीवन में रहते हुए कमल समान जीवन जीने की प्रेरणा दी।
समारोह में मुख्यालय से बी.के. मोहन सिंघल भाई, दिल्ली श्री फोर्ट सेवा केंद्र की निदेशिका बी.के. गीता दीदी, माउंट आबू से पधारी बी.के. रुक्मणी दीदी, बी.के. विजय दीदी, बी.के. राजकुमारी एवं बी.के. सुनीता ने भी मातृशक्ति को अपनी शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. विलियम सिलवामूर्ति सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। दिल्ली से आए कलाकारों ने नाटिका के माध्यम से माताओं के त्यागमय जीवन और आध्यात्मिक यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे उपस्थित सभी भाव-विभोर हो उठे।
समारोह में आत्मिक शक्ति और आंतरिक सुख-शांति का संदेश देते हुए बताया गया कि आत्मा शुद्ध, शक्तिशाली, आनंदमय और शांत स्वरूप है। जब व्यक्ति अपने आत्मिक स्वरूप की पहचान करता है, तो उसे बाहरी साधनों पर निर्भर रहने की आवश्यकता कम होती जाती है और भीतर से शांति एवं प्रसन्नता का अनुभव होने लगता है।
मातृशक्ति के त्याग, तपस्या, सेवा और आध्यात्मिक पुरुषार्थ को समर्पित यह अभिनंदन समारोह समाज में नारी शक्ति की गरिमा और उसके सकारात्मक योगदान का प्रेरणादायी संदेश लेकर आया।



























