पुणे के पिसोली स्थित जगदम्बा भवन में दिनांक 20 जुलाई 2025 को ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के युवा प्रभाग और सिंहगड कॉलेज (NSS यूनिट) के संयुक्त सहयोग से विशेष युवा कार्यक्रम “उत्साह – योग, संगीत और माइंडफुलनेस” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में नई ऊर्जा, आत्मिक जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण को सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे पैरालंपिक तैराक एवं अर्जुन पुरस्कार विजेता श्री सुयश जाधव, जिन्होंने अपने संघर्षमय जीवन की प्रेरक यात्रा साझा करते हुए कहा – “मेरे जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आए जब लगा कि सब कुछ थम गया है। लेकिन मेरी सोच थी – अगर शरीर में कुछ कम हो गया है, तो मैं मन से और अधिक मजबूत बनूंगा। जब हम अपने आप पर विश्वास रखते हैं और मन को सही दिशा में लगाते हैं, तब जीवन की हर चुनौती एक अवसर बन जाती है।” उन्होंने आगे कहा कि ध्यान और आंतरिक शांति उनके जीवन के संतुलन का आधार रहे हैं, और ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांतिपूर्ण वातावरण एवं सकारात्मक ऊर्जा की उन्होंने सराहना की
कार्यक्रम की सह-निदेशिका बी.के. शीतल बहन ने युवाओं को उत्साह की शक्ति का महत्व समझाते हुए कहा कि उत्साह एक ऐसी ऊर्जा है जो आत्म-विश्वास को जागृत कर जीवन को नया आयाम देती है। उन्होंने सभी उपस्थित युवाओं को राजयोग ध्यान का अभ्यास करवाया, जिससे सभी ने गहन शांति और मानसिक स्थिरता का अनुभव किया।
अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज श्री मोहिंदर सिंह ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि “युवा वह शक्ति है जो राष्ट्र के भविष्य को आकार देती है। ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम युवाओं में नई दिशा और सकारात्मक ऊर्जा भरते हैं।”
सिंहगड कॉलेज के प्रोफेसर अविनाश पाटिल ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान का यह प्रयास यह दर्शाता है कि आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से युवा अपने जीवन का उद्देश्य पहचान सकते हैं और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर सच्ची सफलता की ओर अग्रसर हो सकते हैं।
इस अवसर पर बी.के. श्रद्धा बहन ने संगीत के माध्यम से योग का अभ्यास करवाया, जबकि बी.के. श्वेता बहन ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया।
कार्यक्रम में 100 से अधिक युवाओं ने सहभागिता की और उन्होंने प्रेरणादायक विचारों, ध्यान अभ्यास एवं आध्यात्मिक वातावरण से गहरा लाभ प्राप्त किया।
समापन अवसर पर सभी अतिथियों ने ब्रह्माकुमारी संस्थान की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में सकारात्मकता, आत्मिक मूल्यों और आंतरिक शांति को जाग्रत करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
यह आयोजन न केवल प्रेरणादायक रहा, बल्कि युवाओं के लिए आत्म-विकास और आत्म-जागृति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।
























