तिरुवूरु, आंध्र प्रदेश में आयोजित कार्यक्रम स्वस्थ जीवन का रहस्य – मन और तन का संतुलन एवं नव-निर्मित ब्रह्माकुमारीज़ सेंटर भवन के उद्घाटन समारोह में 1000 से अधिक लोगों की उपस्थिति दर्ज़ की गई, जिसमें लगभग 400 ब्रह्माकुमारीज़ परिवार के सदस्य और 600 स्थानीय व समीपवर्ती क्षेत्रों से आए अतिथि शामिल थे।
विजयवाड़ा, मचिलीपट्टनम, खम्मम, कोठगुडेम, गुंटूर, चिलकलूरिपेट, नूजिवीडु, वैरा, वरंगल, सत्तुपल्ली सहित लगभग 60 स्थानों से भाई‑बहनों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम की शुरुआत दिव्य शांति यात्रा से हुई, जिसके उपरांत शिवबाबा ध्वजारोहण, नवनिर्मित भवन का उद्घाटन तथा बाबा कक्ष का शुभारंभ जैसे अनेक प्रेरणास्पद आयोजन संपन्न हुए। बच्चों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ व नृत्य सभी उपस्थितजनों को मंत्रमुग्ध कर गए।
मुख्य अतिथि डॉ. मंतेना सत्यनारायण राजू जी (प्रकृति‑चिकित्सक एवं प्रकृति आश्रम के संस्थापक, विजयवाड़ा) ने उपस्थित जनसमूह को प्रकृति‑आधारित जीवनशैली की महत्ता बताई और कहा कि “शारीरिक स्वास्थ्य के लिए प्रकृति‑आधारित जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य के लिए राजयोग अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने रोग‑मुक्त जीवन हेतु अनेक अमूल्य सूत्र साझा किए।
कोलिकापुड़ी श्रीनिवास राव जी (विधायक, तिरुवूरु) ने कहा –
“राजयोग ध्यान से ईश्वर के गुण हमारे जीवन में समा जाते हैं। यह विपरीत परिस्थितियों का साहस से सामना करने का मानसिक बल देता है। विशेषकर आज के समय में बच्चों को जीवन‑मूल्य सिखाने के लिए राजयोग अत्यावश्यक है।”
अन्य विशिष्ट अतिथियों में प्रमुख रूप से –
- कंचर्ल मुथ्या प्रसाद जी – वरिष्ठ अधिवक्ता एवं स्थानीय समाजसेवी
- गुडिमेटला मुरली जी – अध्यक्ष, आर्यवैश्य संघ
की गरिमामयी उपस्थिति रही।
BK सविता बहनजी (प्रभारी, वरंगल सबज़ोन) और BK शांता बहनजी (डायरेक्टर, यूनिवर्सल पीस रिट्रीट सेंटर, विजयवाड़ा) ने अपने संदेश में राजयोग सेवाओं के महत्व को बताया। उन्होंने बताया कि तिरुवूरु सेवाकेंद्र पर प्रतिदिन प्रातः व सायंकाल नि:शुल्क राजयोग कक्षाएँ उपलब्ध हैं।
इस शुभ अवसर पर रक्षाबंधन का आध्यात्मिक रहस्य समझाते हुए, सभी को यह प्रतिज्ञा दिलाई गई कि – “दुःख लेंगे नहीं – दुःख देंगे नहीं।” तत्पश्चात, सभी उपस्थितजनों को प्रेमपूर्वक रक्षासूत्र (राखी) बाँधी गई।
यह सम्पूर्ण आयोजन न केवल जनजागरण का माध्यम बना, बल्कि आत्म-बल और संयमपूर्ण जीवनशैली की प्रेरणा का स्रोत भी सिद्ध हुआ।




























