ब्रह्माकुमारीज़ गुजरात ज़ोन द्वारा वडोदरा के ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस में “India: The Lighthouse – A Global Dialogue” विषय पर एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ की अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता राजयोगिनी बीके शिवानी दीदी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन के माध्यम से उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को आत्मचिंतन, आध्यात्मिक जागृति और जीवन में श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।


कार्यक्रम में वडोदरा की राजमाता शुभांगिनी राजे गायकवाड़, गुजरात ज़ोन की निदेशिका राजयोगिनी बीके भारती दीदी, महादेव नगर सबज़ोन की प्रभारी बीके चंद्रिका दीदी, अंबावाड़ी सबज़ोन की प्रभारी बीके शारदा दीदी, मेहसाणा सबज़ोन की प्रभारी बीके सरला दीदी, मणिनगर सबज़ोन की प्रभारी बीके नेहा दीदी, अलकापुरी सेवा केंद्र की प्रभारी बीके डॉ. निरंजना दीदी, मंगलवाड़ी सेवा केंद्र की प्रभारी बीके राज दीदी तथा अटलादरा सेवा केंद्र की प्रभारी बीके डॉ. अरुणा दीदी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लगभग 60 गणमान्य प्रतिनिधियों ने भी संवाद कार्यक्रम में सहभागिता की।

आत्मपरिवर्तन से समाज में सकारात्मक बदलाव
बीके शिवानी दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि

जब व्यक्ति स्वयं शांति, प्रेम, शक्ति और सकारात्मकता से भरपूर होता है, तभी वह दूसरों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने सभी को प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट स्वयं के लिए निकालने, ध्यान एवं राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करने और घर, कार्यस्थल तथा समाज में मानवीय मूल्यों का प्रकाश फैलाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने स्वच्छता, अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केवल अपने घर को स्वच्छ रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्थानों, शहरों और पूरे देश को स्वच्छ रखने की भावना भी प्रत्येक नागरिक में विकसित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ संस्कार, अनुशासन और जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार ही एक बेहतर समाज की नींव हैं। जीवन में अच्छे कार्यों की शुरुआत भविष्य पर टालने के बजाय आज और अभी से करनी चाहिए।
आध्यात्मिक जागृति और मूल्यनिष्ठ जीवनशैली का संदेश

बीके शिवानी दीदी ने आत्मिक पहचान का महत्व समझाते हुए कहा कि
शरीर पंचतत्वों से बना है, लेकिन जीवन की वास्तविक शक्ति आत्मा है। जिस प्रकार दीपक की लौ उसे प्रकाशमान बनाती है, उसी प्रकार आत्मिक चेतना जीवन को प्रकाशमय बनाती है। उन्होंने कहा कि स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा से संबंध जोड़ने और सकारात्मक विचारों को अपनाने से जीवन में शांति, सुख और संतुलन का अनुभव किया जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि
आध्यात्मिक जागृति का अर्थ मूल्यनिष्ठ जीवनशैली अपनाना है। राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से व्यक्ति स्वयं का मूल्यांकन कर सकता है, अपनी वास्तविक पहचान को समझ सकता है और जीवन में श्रेष्ठ संस्कारों को धारण कर सकता है। उन्होंने सात्विक भोजन और सकारात्मक विचारों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वस्थ विचार और श्रेष्ठ जीवनशैली समाज को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दस राउंड टेबल संवाद सत्रों में हुआ विचार-विमर्श

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित दस राउंड टेबल संवाद सत्रों में राजनीतिक, प्रशासनिक, शैक्षणिक, औद्योगिक, व्यावसायिक एवं स्वास्थ्य क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इन सत्रों में सात्विक भोजन, चरित्र निर्माण, नैतिकता, मानवीय मूल्यों और मूल्यनिष्ठ नेतृत्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अतिथियों को विशेष स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। संवाद के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों को जीवन एवं नेतृत्व का आधार बनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
यह आयोजन भारत की आध्यात्मिक विरासत, नैतिक मूल्यों और आत्मिक जागृति को वैश्विक संवाद से जोड़ने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल रहा। बीके शिवानी दीदी के संदेश ने उपस्थित प्रतिनिधियों को स्वयं में परिवर्तन लाने, श्रेष्ठ संस्कार अपनाने और समाज में शांति, स्वच्छता, एकता एवं सकारात्मकता का प्रकाश फैलाने के लिए प्रेरित किया।

















