आबूरोड (राजस्थान), 9 अक्टूबर 2025।
ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के महासचिव, 92 वर्षीय राजयोगी बृजमोहन भाई का निधन हो गया है। उन्होंने गुरुवार को दिल्ली मानेसर स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान सुबह 10:25 बजे अंतिम सांस ली। पिछले एक वर्ष से वे अस्वस्थ चल रहे थे। प्रारंभ में उनका इलाज माउंट आबू स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल में और तत्पश्चात अहमदाबाद में किया गया था।
उनकी पार्थिव देह को 9 और 10 अक्टूबर को गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में श्रद्धांजलि और दर्शनार्थ रखा गया है। उनका अंतिम संस्कार 12 अक्टूबर को आबूरोड मुक्तिधाम में किया जाएगा।
एक वर्ष पूर्व राजयोगी निर्वैर भाई के निधन के बाद, राजयोगी बृजमोहन भाई को महासचिव नियुक्त किया गया था। इससे पूर्व वे अतिरिक्त महासचिव के रूप में सेवाएं दे रहे थे। वे संस्थान के मुख्य प्रवक्ता एवं राजनीतिज्ञ सेवा प्रभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे।
जीवन परिचय और सेवायात्रा:
7 जनवरी 1934 को अमृतसर (पंजाब) में जन्मे राजयोगी बृजमोहन भाई ने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1953 में वाणिज्य (ऑनर्स) में स्नातक और 1955 में कानून (एलएलबी) की डिग्री प्राप्त की। 1956 में उन्होंने चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में मान्यता प्राप्त की। उसी वर्ष वे ब्रह्माकुमारीज़ के संपर्क में आए और राजयोग मेडिटेशन सीखने के पश्चात ब्रहमचर्य व्रत लेते हुए विश्व सेवा का संकल्प किया।
भारत सरकार के फर्टिलाइज़र कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में 17 वर्ष तक सेवाएं देने के बाद, उन्होंने 1973 में वित्त प्रबंधक के पद से त्यागपत्र देकर संस्था में पूर्ण रूप से समर्पित होकर सेवा प्रारंभ की।
वे राजयोग शिक्षा एवं अनुसंधान फाउंडेशन के सचिव तथा ब्रह्माकुमारीज़ की एपेक्स कमेटी (उच्च समिति) के सदस्य थे। संस्थान के एकाउंट विभाग के प्रमुख के रूप में उन्होंने अपनी सूक्ष्म बुद्धि और प्रबंधन क्षमता से अनेक नयी व्यवस्थाओं को दिशा दी।
अंतरराष्ट्रीय सेवाएं और योगदान:
राजयोगी बृजमोहन भाई ने संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में ब्रह्माकुमारीज़ का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने रूस, अमेरिका, कनाडा, दक्षिण अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, केन्या, दक्षिण-पूर्व एशिया और कैरेबियन देशों का दौरा कर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का संदेश दिया।
गीता ज्ञान के प्रखर ज्ञाता:
बचपन से ही अध्यात्म में रुचि रखने वाले बृजमोहन भाई को श्रीमद् भागवत गीता के अध्ययन में गहरी रुचि थी। उनके अधिकांश प्रवचन गीता ज्ञान पर आधारित होते थे। उनका मानना था कि गीता में जीवन का सार निहित है और उसका प्रचार ही आत्मिक जागृति का माध्यम है। वे जटिल आध्यात्मिक सत्यों को सरलता, हास्य और बुद्धिमत्ता के साथ प्रस्तुत करने में निपुण थे।
संस्थान की वरिष्ठ बहनों के श्रद्धासंदेश:
राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी, मुख्य प्रशासिका, ब्रह्माकुमारीज़ ने कहा –“राजयोगी बृजमोहन भाईजी संस्थान के आधार स्तंभ सदस्यों में से एक थे। वे कुशल वक्ता, लेखक और उत्तम मार्गदर्शक थे। उनका जाना ब्रह्माकुमारीज़ परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता।”
राजयोगिनी बीके जयंती दीदी, अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका, ब्रह्माकुमारीज़ ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा –“बृजमोहन भाईजी ने अपना पूरा जीवन समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनकी बुद्धिमत्ता और कुशल मार्गदर्शन से संस्थान ने नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं। उनका प्रेरक, दिव्य व्यक्तित्व सदा सभी के हृदयों में अमर रहेगा।”
संक्षेप में:
राजयोगी बृजमोहन भाई का जीवन त्याग, सेवा, और आध्यात्मिकता का जीवंत उदाहरण रहा। उनकी शिक्षाएँ और प्रेरणाएँ न केवल ब्रह्माकुमारीज़ परिवार बल्कि विश्वभर के आत्मिक साधकों को सदैव दिशा प्रदान करती रहेंगी।
































