अपने मन के राजा बनें और शासन करें (भाग 3)

सदियों से दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों पर अनेक शासकों ने राज किया है। एक समय ऐसा भी था जब इस पूरी सृष्टि पर ऐसे शासकों का राज्य था, जिनके शासन में दुःख, घृणा, अन्याय और अशांति का कोई नामोनिशान नहीं था। आज हम उन्हें देवता और देवियों के रूप में जानते हैं। उनकी सफलता का रहस्य क्या था? उनके पास केवल शासन करने की कला ही नहीं, बल्कि
सफल जीवन के लिए आवश्यक सभी दिव्य गुण और शक्तियाँ भी थीं। तो एक रूहानी राजा अर्थात् मैं आत्मा की सफलता का रहस्य क्या है?
यह है—अपनी रूहानी शक्तियों को बढ़ाना और उन्हें अपने व्यक्तित्व का स्वाभाविक हिस्सा बना लेना। यह कैसे संभव होगा? इसके लिए हमें स्वयं के बारे में सकारात्मक स्वमान का अभ्यास करना होगा। जैसे—मैं शांति, प्रेम, आनंद और शक्ति से भरपूर आत्मा हूं।
ऐसे गुणों से जुड़े विचारों का नियमित निर्माण करें, जिनका उल्लेख कल के संदेश में किया गया था। जब हम इन गुणों से भरपूर विचारों को प्रतिदिन अपने चेतन मन में बार-बार दोहराते हैं, तो वे धीरे-धीरे हमारे अवचेतन मन पर गहरी सकारात्मक छाप छोड़ते हैं। परिणामस्वरूप, एक रूहानी राजा के रूप में मेरा व्यक्तित्व इन दिव्य गुणों से भरने लगता है। यही गुण आगे चलकर मेरी रूहानी शक्तियों को बढ़ाते हैं और मुझे एक शक्तिशाली राजा बना देते हैं। ऐसे राजा के पास आठ प्रमुख रूहानी शक्तियाँ होती हैं—सहन करने की शक्ति, समाने की शक्ति, सामना करने की शक्ति, परखने की शक्ति, निर्णय लेने की शक्ति, विस्तार को सार में लाने की शक्ति, समेटने की शक्ति और सहयोग करने की शक्ति। तब मेरे राज्य के मंत्री अर्थात् मेरे विचार और भावनाएँ, तथा राज्य की प्रजा अर्थात् मेरे दृष्टिकोण, अभिव्यक्तियाँ, शब्द और कर्म, सभी अपने शक्तिशाली राजा की आज्ञा का पालन करने लगते हैं। वे हर परिस्थिति में मेरे गुणों और आठों शक्तियों के अनुरूप प्रतिक्रिया देना सीख जाते हैं। जैसा राजा, वैसे मंत्री; जैसे मंत्री, वैसी प्रजा। परिणामस्वरूप पूरे राज्य में शांति, प्रेम और आनंद का वातावरण स्थापित हो जाता है। ऐसा सुव्यवस्थित राज्य उच्च आत्म-सम्मान का प्रतीक होता है। इतना ही नहीं, जो भी लोग ऐसे राजा और उसके राज्य के संपर्क में आते हैं, वे भी उसके दिव्य गुणों और रूहानी शक्तियों का अनुभव करते हैं। यही कारण है कि ऐसा राजा स्वयं भी सम्मान प्राप्त करता है और दूसरों के हृदय में भी सहज सम्मान का पात्र बन जाता है।
आज का अभ्यास
आज स्वयं को शांति, प्रेम, आनंद और शक्ति से भरपूर आत्मा अनुभव करें। प्रत्येक विचार और कर्म में इन गुणों को प्रकट करने का अभ्यास करें ताकि वे स्वभाव बन जाएँ।
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