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विश्व नाटक में आत्मा की यात्रा (भाग–1)

विश्व नाटक में आत्मा की यात्रा (भाग–1)
Journey

महाशिवरात्रि 15 फरवरी पर विशेष आध्यात्मिक संदेश

हम सभी परमात्मा को अपनी प्रार्थनाओं, भजनों और रीति-रिवाजों में पुकारते आए हैं। हमारे पास जो कुछ भी है, उसके लिए हम उन्हें धन्यवाद देते आए हैं.... उनकी शक्तियों की महिमा करते आए हैं… उन्हें मदद के लिए पुकारते आए हैं.... और हमारे पापों को क्षमा करने के लिए कहते आए हैं... इस तरह से हम सभी हर दिन परमात्मा से बात करते हैं… पर क्या हमने कभी ये जानने की कोशिश की है कि, वो हमसे क्या कहना चाहते हैं? इस महाशिवरात्रि या शिव जयंति (इस वर्ष 15 फरवरी) पर, परमात्मा द्वारा दिए गए संदेश को सुनें जिसमें आपको वो सारे जवाब मिल सकते हैं जिन्हें आप वर्षों से जानना चाहते थे। आइए सुनें कि, वे हमसे क्या कह रहे हैं:

मेरे मीठे बच्चे, तुम मुझे भूल गए हो, क्योंकि हम बहुत समय से नहीं मिले हैं। तुमने मेरे बारे में सुना है, पढ़ा है, लेकिन

अब वह समय आ गया है जब मैं तुमसे सीधे बात करना चाहता हूँ और वह सत्य बताना चाहता हूँ, जिसे तुम हमेशा जानना चाहते थे। इससे पहले कि मैं अपने बारे में बताऊँ, पहले मैं तुम्हें याद दिलाना चाहता हूँ कि तुम वास्तव में कौन हो। मीठे बच्चे, तुम वह नहीं हो जो तुमने अपने नाम, जाति, धर्म, पेशा या रिश्तों के आधार पर खुद को समझ लिया है। तुम यह शरीर भी नहीं हो, जो इन आँखों से दिखाई देता है।

तुम एक ज्योति-बिंदु आत्मा हो—अति सूक्ष्म, प्रकाशमय चेतना। एक ऐसी आत्मा, जिसने अपने रोल निभाने के लिए अनेक जन्मों में अलग-अलग शरीर धारण किए हैं। तुम मूल रूप से पवित्र, शांत, प्रेमस्वरूप और शक्तिशाली हो।

आज से लगभग 5000 वर्ष पहले, तुम सभी मेरे साथ अपने घर—आत्माओं के घर, सोल वर्ल्ड—में रहते थे। वह शांति और पवित्रता की दुनिया थी। फिर, अपने-अपने रोल निभाने के लिए, तुम इस भौतिक संसार में आए। जब तुम पहली बार धरती पर आए, तब तुम संपूर्ण, श्रेष्ठ और सतोप्रधान थे। हर आत्मा को अपना किरदार निभाने के लिए एक सुंदर और श्रेष्ठ शरीर मिला था। उस समय यह संसार भी दिव्य था—प्रेम, शांति और समृद्धि से भरपूर। इसी कारण उसे स्वर्ग, जन्नत या बहिश्त कहा गया। जब एक शरीर बूढ़ा हो जाता था, तो आत्मा नया शरीर लेकर अपना अगला रोल निभाती थी। इस तरह सोल वर्ल्ड से और आत्माएँ इस संसार में आती गईं। लगभग 2500 वर्षों तक तुम सभी आत्माएँ इस सुखमय संसार का आनंद लेती रहीं, जिसे सतयुग और त्रेतायुग कहा जाता है।

(कल भी जारी रहेगा)

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Nirakar Shiv Hai aaye

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आज का अभ्यास

वर्षों से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर इस लेख में छिपे हैं। महाशिवरात्रि के संदेश के साथ आत्मा की पहचान, स्वर्ग की शुरुआत और विश्व नाटक में आत्मा की भूमिका को समझें। यह श्रृंखला का पहला भाग है।

किसे भेजें यह संदेश?किसी को आज इसकी जरूरत है

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