प्रशंसा में स्थिर रहें

जब लोग, हमें हमारे कार्यों या गुणों के लिए सराहते हैं, तो दरअसल वे अपने दृष्टिकोण द्वारा हमारी अच्छाई देखने की, अपनी खूबी को प्रकट करते हैं। उनकी प्रशंसा, उनके दृष्टिकोण पर आधारित होती है, जो समय के साथ बदल सकती है। हमें उनके इस भाव के लिए आभार प्रकट करना चाहिए, परन्तु प्रशंसा में बह जाने की आदत नहीं डालनी चाहिए। सोशल मीडिया पोस्ट पर कम लाइक्स मिले या आपके बॉस ने आपके वीकेंड के काम को महत्व नहीं दिया, तो क्या आप इन चीजों से प्रभावित होते हैं? क्या आपको महसूस होता है कि आपको प्रशंसा पाने की जरूरत है? प्रशंसा पाना और उसकी लालसा करना दो अलग बातें हैं। प्रशंसा पाने की चाह रखना एक अलग बात है। प्रशंसा तो व्यक्ति-व्यक्ति की सोच पर निर्भर करती है। एक व्यक्ति हमारी तारीफ़ कर सकता है, तो दूसरा हमें नीचे गिराने वाली बातें भी कह सकता है। यदि हमें प्रशंसा की आदत पड़ जाए, तो इसका असर हमारे जीवन के निर्णयों पर पड़ सकता है। फिर हम बार-बार वही काम करने लगते हैं जिनसे लोग हमसे प्रभावित हों या हमारी तारीफ़ करें।
जब कोई हमारी प्रशंसा करता है, यह उनके सुंदर व्यक्तित्व का परिचायक है कि वे हममें अच्छाई देख सकते हैं। अतः प्रशंसा उनके बारे में है, नाकी हमारे बारे में है।
इस समझ के साथ हम स्थिर और विनम्र रह सकते हैं और अपने अहंकार को नियंत्रण में रख सकते हैं। प्रशंसा को आत्मसात करने की बजाय परमात्मा को धन्यवाद देते हुए उन्हें समर्पित करें। साथ ही, प्रशंसा करने वाले व्यक्ति का भी विनम्रता से आभार व्यक्त करें।
हमेशा याद रखें कि, आप एक विनम्र व्यक्ति हैं। सभी के प्रति प्रेम और स्नेह को प्रकट करें, अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करें। जब लोग आपके गुणों और प्रतिभा से प्रसन्न होते हैं, तो वे आपकी सराहना करते हैं। परन्तु यह बात आपको प्रभावित नहीं करती, क्योंकि आप स्वयं की पहचान के लिए कुछ नहीं करते बल्कि आप अपने ऑथेंटिक सेल्फ में रहते हैं। जब भी आपकी प्रशंसा हो, अपने मन को याद दिलाएं कि, आप परमात्मा के साधन हैं, जो इस कार्य के लिए चुने गए और लोगों की सेवा करने के लिए नियत किए गए थे, इसके लिए स्वयं को भाग्यशाली समझें। परमात्मा को धन्यवाद दें, मिलने वाली प्रशंसा को उनके प्रति समर्पित करें, इस अवसर के लिए लोगों का धन्यवाद करें और लोगों से यह भी कहें कि उनकी प्रशंसा उनकी अपनी अच्छाई की अभिव्यक्ति है। प्रशंसा में स्थिर रहें, अपेक्षाएं न रखें, इसे स्वयं के लिए न अपनाएं, और नाही यह आपको प्रभावित करे। अपनी स्वाभाविक विनम्रता को अपने जीने का तरीका बनाएं।
आज का अभ्यास
आज ध्यान दें कि आपका आत्मविश्वास दूसरों की प्रशंसा पर आधारित तो नहीं है। अपनी वास्तविक पहचान को भीतर अनुभव कर स्थिर रहने का अभ्यास करें।
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