स्त्री-पुरुष की भूमिकाएँ निभाने के लिए आत्मिक गुणों का सुंदर संतुलन

दुनिया में कुछ स्वभाव और गुण परंपरागत रूप से महिलाओं से जोड़े जाते हैं और कुछ पुरुषों से।
महिलाओं से जुड़े गुण:
शक्ति, पालन-पोषण करने वाली, करुणामयी, कोमल, सौम्य, गर्मजोशी से भरपूर, नरम स्वभाव, समझदार, सहानुभूतिपूर्ण, अंतर्ज्ञानी।
पुरुषों से जुड़े गुण:
अधिकारपूर्ण, मजबूत, जिम्मेदारी उठाने वाले, विश्लेषण करने वाले, आक्रामक, साहसी, निर्णायक, प्रतिस्पर्धी, मिलनसार।
यदि हम अपने स्वभाव को देखें तो पाएँगे कि हम सभी में ये दोनों प्रकार के गुण किसी न किसी मात्रा में मौजूद हैं। यह मात्रा हमारे संस्कारों, पिछले अनुभवों और सामाजिक वातावरण पर निर्भर करती है। इसलिए हम देखते हैं कि कुछ पुरुष कई महिलाओं से भी अधिक संवेदनशील, दयालु और भावुक होते हैं। उसी तरह कुछ महिलाएँ कई पुरुषों से अधिक साहसी, अधिकारपूर्ण और सक्षम होती हैं।
वास्तव में हम सभी एक शुद्ध चेतन ऊर्जा, एक आत्मा हैं, जो एक शरीर रूपी वेशभूषा पहनती है। पुरुष और महिला शरीर आत्मा की अलग-अलग वेशभूषाएँ हैं।
अनेक जन्मों की यात्रा में हर आत्मा ने कभी पुरुष तो कभी महिला शरीर धारण किया है। हर आत्मा में वे सभी संस्कार होते हैं जो परंपरागत रूप से स्त्री और पुरुष दोनों से जुड़े हैं — बस उनकी मात्रा अलग-अलग होती है। इसे ऐसे समझें जैसे एक सीडी में कई गीत होते हैं। एक जन्म में, शरीर और वातावरण के अनुसार कुछ विशेष संस्कार उभरते हैं — यानी कुछ विशेष “गीत” बजते हैं। फिर अगले जन्म में, अलग शरीर और परिस्थितियों के अनुसार दूसरे संस्कार उभरते हैं — यानी दूसरे “गीत” बजते हैं। लेकिन आत्मा रूपी सीडी में सभी संस्कार मौजूद रहते हैं।
हर आत्मा शुद्ध और शक्तिशाली है। हर आत्मा में ये संस्कार होते हैं:
- 1पालन-पोषण करने और निस्वार्थ सेवा करने की भावना
- 2अंतर्ज्ञान और विश्लेषण दोनों की क्षमता
- 3परिस्थिति में कोमल बनकर समायोजन और सहन करने की शक्ति, और आवश्यकता पड़ने पर मजबूत बनकर सामना करने की ताकत
- 4कोमलता और साहस — दोनों का संतुलन
हर कर्म में हमें इन गुणों को प्रकट करना है: दृढ़ संकल्प शक्ति, करुणा, पालन-पोषण की भावना, आत्मविश्वास, निडरता, गरिमा, सम्मान और स्वीकार भाव। पहले हमें स्वयं को शक्तिशाली बनाना है। जब हम स्वयं सशक्त होते हैं, तभी हम दूसरों को भी सशक्त बना सकते हैं।
आज का अभ्यास
स्त्री और पुरुष भूमिकाएँ निभाने के लिए आत्मिक गुणों का संतुलन आवश्यक है। हर आत्मा में करुणा, साहस, शक्ति और कोमलता मौजूद हैं। इन्हें जागृत कर हम स्वयं और दूसरों को सशक्त बना सकते हैं।
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