
मेडिटेशन : हर व्यक्ति के जीवन में क्यों उपयोगी है
जानिए मेडिटेशन क्यों आवश्यक है। राजयोग से बच्चों, वयस्कों व बुज़ुर्गों को कैसे मिले जीवन में संतुलन व सकारात्मकता।
हाल ही में हमारे दो वर्ष कोरोना महामारी में गुज़र गए, जिन्होंने हमें आने वाले वर्षों के लिए बहुत कुछ प्रेरणाएं दीं। बहुत लोग हिम्मत हार कर बैठ गए और बहुतों के दिल में आज भी मशाल जल रही है और जलनी भी चाहिए क्योंकि ज़िंदगी का सार हार और थक कर बैठ जाना नहीं है। ज़िंदगी का सार है – सामना करना, लड़ना, जीतना और अगर हार भी जाये तो भी फिर से उठना और फिर लड़ना।
फौजी को देखा है कभी? क्या सीख मिलती है उससे? क्या वो अपनी सेना के सैनिकों को जब दम तोड़ते या घायल होते देखता है, तो क्या वो स्वयं को भी अपनी दुश्मन सेना के सामने समर्पित कर देता है या हार मान कर बैठ जाता है? नहीं ना, वो ऐसा तो हरगिज़ नहीं करता। वो लड़ता है अपने आखिर दम तक। ऐसा ही हमें भी करना चाहिए।
अगर हमारे अपने हमें छोड़कर भी चले गए तो क्या उनके गम में स्वयं हार कर बैठना सही है? ये समझदारी नहीं है, क्योंकि हमारा जीवन भी तो कर्मक्षेत्र है उस सैनिक की तरह। वहाँ (उस युद्ध के मैदान में) हमला होता है दूसरे देश की सेना का और यहाँ हमला होता है स्वयं की सेना का। स्वयं की सेना माना अपने ही मन व बुद्धि जिसके राजा हम स्वयं हैं और ये हमारी प्रजा है। वहाँ हमला करने वाले हथियार हैं- बंदूक व तोप और यहाँ हमला करने वाले हथियार हैं- व्यर्थ व नकारात्मक संकल्प, क्योंकि यही तो हमें मार गिराते हैं। एक सैनिक तब तक नहीं हारता, जब तक वो स्वयं से ना हार माने, फिर चाहे सामने से कितना ही भयंकर हमला क्यों ना हो। ठीक ऐसे ही यहाँ भी एक आत्मा तब तक नहीं हारती, जब तक वो स्वयं से हार ना मान लें।
वहाँ के सैनिक की प्रतिदिन ट्रेनिंग होती है और साथ ही साथ उनके भोजन का ख्याल हर वक्त रखना होता है। अब सवाल आता है कि हमारी ट्रेनिंग और भोजन क्या है? आइए जानते हैं।
देखिये, हमारे मन का भोजन है ‘संकल्प’ और बुद्धि का भोजन है ‘ज्ञान’। हमारे मन का कार्य है ‘सोचना’। इसको हम रोक नहीं सकते परंतु हम इसको दिशा दे सकते हैं। इसकी दिशा हम हर रोज़ ज्ञानामृत का पान करने से बदल सकते हैं और ये ज्ञानामृत है ‘ईश्वरीय महावाक्य’, जिसका प्रत्येक दिन श्रवण करने से हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। वास्तव में यह ज्ञान ऐसा है जो हमें यथार्थ निर्णय लेने में मददगार बनाता है।
अब हमारी ट्रेनिंग है – हमारा योगाभ्यास। जितना हम मन और बुद्धि की ड्रिल करते हैं माना योग करते हैं, उतना हम तंदरूस्त बनते हैं। सरल शब्दों में कहें तो जितना हम अपने मन की तार परमात्मा से जोड़ते हैं, उतना ही हम शक्तिशाली बनते हैं। कोरोना काल को देखें, तो उनमें जो व्यक्ति स्वयं के मन से जीत गया वो कोरोना से भी जीत गया था और जो स्वयं से हारा था, वो कोरोना से भी हार कर दम तोड़ गया था।
कहते हैं किसी के वर्तमान को देख उसके भविष्य की कल्पना मत करना क्योंकि भविष्य में इतनी ताकत है कि वो कोयले को हीरे में बदल सकता है। तो क्या हमारा जीवन नहीं बदल सकता! समस्या आती ही जाने के लिए है, परंतु हम उसे सदाकाल का समझ कर हिम्मत खो देते हैं। पहले भी ना जाने कितनी महामारियां आई संसार में, तो क्या सभी सदाकाल के लिए रहीं? नहीं ना! वो 2,4,6 वर्षों में खत्म हो ही गयीं ना! सभी यही सिखाकर गयी कि समय भी अपना समय आने पर बदल ही जाता है। कुछ भी स्थाई नहीं है जीवन में।
जो भी हमारे जीवन में होता है सब कल्याणकारी है, ये लाइन भी सदैव याद रखिये। और हाँ, ज़िंदगी कभी विद्यालय के अध्यापक की तरह सीधे-सीधे नहीं पढ़ाती, यह सदैव पहले परिस्थिति का उदाहरण देती, तत्पश्चात् समझाती है ताकि आपको सदाकाल के लिए इसके पढ़ाये हुए पाठ याद रह सकें।
तो अब आगे कभी परिस्थिति आये, तो यही स्मरण रखना कि ज़िंदगी अब फिर से नया पाठ, नये उदाहरण के साथ समझा रही है और विशाल बुद्धि बन, धैर्यता से समझने का प्रयास करना, फिर एक दिन आप फतह का झंडा निश्चित रूप से लहरायेंगे, ये हमारा विश्वास है।

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Celebrate World Wildlife Day with a deeper perspective! 🌿 Discover the lost spiritual connection between humans and nature, how consciousness shapes the environment, and simple ways to restore harmony with the planet. 🌏✨

“Ravana’s defeat goes deeper than firecrackers. Dive into the spiritual significance of Dussehra and learn how to awaken your inner self. #SpiritualAwakening #DussehraLessons”

This International Day of Families, let’s honor our spiritual and environmental duties to nurture the Earth. 🌐💖 By adopting practices like conscious consumption and energy conservation, families become beacons of change. What steps has your family taken to live more sustainably? Let’s share and inspire each other towards a harmonious planet!

रक्षा बंधन का पर्व सिर्फ भाई-बहन के रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है। इस पर्व के गहरे आध्यात्मिक रहस्यों को जानें और समाज में पवित्रता और मानवता की पुनर्स्थापना करें।

Life is like a big play, and sometimes we forget who we really are. We get caught up thinking our bodies are everything. But there’s a different kind of TV—the one in our minds—that shows us how to be better and happier. Instead, we often watch a different channel, filled with stress and bad habits, making us forget about the good stuff. Tuning into the better channel helps us learn and grow, making us stronger on the inside.

Invoke The Divinity Of Navratri Within (Part 2) The diya reminds us that the body is made from physical elements and I the soul is

● The power represented by Maa Lakshmi is exemplified by her image sitting on a lotus flower, signifying the ability to remain unaffected by negativity while exuding purity and peace. Her two hands, one adorned with gold mudras and the other bestowing blessings, symbolise how a rich and contented soul can offer support and give to others selflessly, without any expectations in return.

After engaging our three primary powers, a fourth power naturally emerges: the “Power to Accept.” It surfaces as tolerance becomes second nature. All soul power serves as our nourishment, akin to a mother nurturing us. Thus, it’s essential not to claim a lack of power to adapt or vice versa. Saying we lack power implies depleting it at the source.

रक्षाबंधन सिर्फ रिश्तों का नहीं, आत्मा और परमात्मा के पवित्र बंधन का उत्सव है — जो सुरक्षा, शांति और पवित्रता देता है।