
ओम शांति।
मैं इस शरीर की मालिक, चैतन्य शक्ति आत्मा, शांत स्वरूप हूँ। मेरे मन के सारे विचारों की गति बिल्कुल धीमी हो गई है।
मेरे पिता परमात्मा भी शांति के सागर हैं। मैं अपने पिता को अपने समक्ष देखती हूँ, निराकार स्वरूप में, ज्योति-बिंदु स्वरूप में। पिता परमात्मा की शांति की शीतल किरणें मुझे स्पर्श करती हैं।
मेरी सारी चिंताएँ, तनाव समाप्त हो रहे हैं। मैं शांत हूँ, स्थिर हूँ और शांति की शक्ति का प्रकाश पूरे विश्व में फैला रही हूँ।
मैं शांत स्वरूप हूँ।
ओम शांति।
इस ध्यान के अनुभव से स्वयं को शरीर की मालिक, चैतन्य शक्ति आत्मा और शांत स्वरूप के रूप में अनुभव किया जा सकता है। मन के विचारों की गति धीमी होने और पिता परमात्मा की शांति की शीतल किरणों का अनुभव करने से शांति और स्थिरता का भाव गहरा होता है।
पिता परमात्मा की शांति की शक्ति का अनुभव करते हुए चिंताओं और तनाव के समाप्त होने का अनुभव होता है। शांति की शक्ति का प्रकाश पूरे विश्व में फैलाने का भाव मन में जागृत होता है।
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