
“जब हर परिस्थिति में सुरक्षित, निर्भय और शक्तिशाली रहकर साहस और धैर्य का अनुभव करना चाहें, तब यह ध्यान करें।”
इस ध्यान के अनुभव से स्वयं को शरीर, मन, बुद्धि और संस्कारों की मालिक शक्तिशाली आत्मा के रूप में अनुभव किया जा सकता है। पिता परमात्मा को सर्वशक्तिमान अनुभव करते हुए उनकी शक्तियों की छाया में स्वयं को सदा सुरक्षित, निर्भय और शक्तिशाली महसूस करने का भाव गहरा होता है।
हर परिस्थिति में आत्मविश्वास, साहस और धैर्य के साथ चलने का अनुभव होता है। स्वयं को मास्टर सर्वशक्तिमान आत्मा के रूप में अनुभव करने से शक्ति और निर्भयता का भाव जागृत होता है।
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ओम शांति। मैं शक्तिशाली आत्मा हूँ। मैं इस शरीर की मालिक हूँ। मैं अपने मन, बुद्धि, संस्कारों की मालिक हूँ। मेरे पिता परमात्मा सर्वशक्तिमान हैं। उनकी शक्तियाँ मेरे चारों तरफ छाया के समान हैं। मैं आत्मा सदा सुरक्षित हूँ, न...
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