
“सुख देना मेरा स्वभाव है, कल्याण मेरी भावना। आज आइए, उस भावना से भरें”
इस ध्यान के अभ्यास से यह अनुभव होता है कि हम साधारण नहीं, बल्कि शक्तिस्वरूप आत्माएं हैं, जो अपने मन, वाणी और कर्मेंद्रियों के स्वामी हैं। आत्म-स्वामित्व की यह भावना हमारे भीतर पवित्रता, करुणा और सूक्ष्म अनुशासन को जाग्रत करती है।
इस अभ्यास के पश्चात आप अपने दिन को आत्म-विश्वास और श्रेष्ठ स्वामान से जिएंगे...
ॐ शांति। कुछ पलों के लिए आराम से बैठें। चारों तरफ से खुद को डिटैच करें और पूरी तरह से प्रेज़ेंट मोमेंट में आ जाएं। इस समय एक श्रेष्ठ संकल्प करें — मैं शक्तिशाली आत्मा हूँ। मैं कमजोर नहीं, शिवशक्ति हूँ, शक्तिस्वरूपा हूँ। ...
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