
“जब परिस्थितियों या लोगों के व्यवहार से मन डिस्टर्ब हो, तब स्वयं को शक्तिशाली और समाधान स्वरूप याद दिलाने के लिए।”
इस गाइडेड मेडिटेशन का अनुभव करने के बाद मन बाहरी बातों से डिटैच होकर अपने आंतरिक जगत को देखने लगता है। इससे यह स्पष्टता आती है कि परिस्थितियां और लोगों का व्यवहार हमारे कंट्रोल में नहीं है, लेकिन हमारा रिस्पॉन्ड हमारे कंट्रोल में है।
यह मेडिटेशन मन को कमजोर होने के बजाय शक्तिशाली, महावीर और समाधान स्वरूप महसूस कराती है। इससे डांट, रिजेक्शन या अपमान के बाद भी दुख लेने के बजाय रहम, क्षमा और शुभ भावना रखने की शक्ति बढ़ती है। मन में यह संकल्प मजबूत होता है कि चाहे बात आए और चली जाए, लेकिन मेरी खुशी ना जाए।
How you want to feel
Life stages
ओम शांति। कुछ पलों के लिए अपने मन को चारों तरफ से डिटैच करें। बाहर से डिसकनेक्ट होकर आंतरिक जगत में क्या चल रहा है, उसको देखें। अपने को याद दिलाएं कि जीवन में आने वाली परिस्थितियां और दूसरे लोगों का व्यवहार हमारे कंट्रोल में नहीं है। हमारे कंट्रोल में है कि हम कैसे रिस्पॉन्ड करते हैं। इसलिए बातों से घबराने के बजाय उनका सामना करें। मैं कमजोर नहीं, शक्तिशाली हूँ। मैं बातों से डरने वाली नहीं, उनको पार करने वाली महावीर हूँ। मैं समस्या स्वरूप नहीं, समाधान स्वरूप हूँ।
अपना ध्यान रखना मेरी पहली जिम्मेवारी है। अगर किसी ने ठीक रीति से व्यवहार नहीं किया, डांट दिया, रिजेक्ट किया, अपमान किया, तो भी अपने को समझाएं। वो उनके संस्कार हैं, वो आत्मा कमजोर है, परवश है, क्योंकि जो दुखी है, वही दुख दे सकता है। लेकिन दुख लेने के बजाय उनके प्रति भी रहम की भावना रखें। उनको भी क्षमा करके मन में उनके लिए भी सिर्फ शुभ भावना रखें। मुझे मेरे मन का ध्यान रखना है, क्योंकि मन जीत ही जगत जीत है। अगर मन शक्तिशाली है, तो बड़ी बात भी छोटी हो जाएगी। इसलिए चाहे कुछ भी हो जाए, बात आए और बात चली जाए, लेकिन मेरी खुशी ना जाए। अंदर में एक संकल्प करें, मुझे खुश रहना है और खुशी बांटनी है। ओम शांति।
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