
“अपनों से उम्मीद नहीं, अपनापन बाँटे। आइए, आज उन्हें वैसे ही स्वीकारें जैसे परमात्मा हमें करता है”
इस ध्यान का अभ्यास रिश्तों में अपेक्षाओं के बोझ को हल्का करता है और यह समझ देता है कि हर आत्मा की यात्रा अलग है। जब हम दूसरों को वैसे ही स्वीकार करना शुरू करते हैं जैसे वे हैं, तो हमारे विचार, वाइब्रेशन और व्यवहार शुभ भावनाओं से भर जाते हैं। यह शुभ भावना दूसरों को सहयोग भी देती है और रिश्तों को फिर से मधुर और स्थिर बनाती है।
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Life stages
ॐ शांति। कुछ पलों के लिए आराम से बैठें। आज अपने मन की स्क्रीन पर उन सभी को लाएँ, जिनके साथ हमने बहुत समय बिताया है — हमारे अपने, हमारे साथी, और वे सभी जिनके साथ हम काम करते हैं। उन्हें थोड़ा न्यारे होकर, एक अलग दृष्टिकोण...
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