
Plays automatically · more from BK Dr. Damini
“जब मन अशांत हो, जीवन में उलझन हो और भीतर की सच्ची शांति को अनुभव करना हो, तब यह शांति गीत गाया या सुना जाए।”
यह शांति गीत मन, तन और विचारों को धीरे-धीरे स्थिर करता है। जब शांति को बाहरी मंत्र नहीं, बल्कि अपने अंतर की अवस्था के रूप में अनुभव किया जाता है, तब भीतर गहरा संतुलन और सुकून आता है।
यह रचना क्रोध, मोह और अहंकार से ऊपर उठकर ध्यान और योग से जुड़ने की प्रेरणा देती है। शांति को अपने मन-मंदिर में अनुभव करते हुए आत्मा स्वयं को हल्का, शांत और प्रेम से भरा हुआ अनुभव करती है — जहाँ शांति कोई शब्द नहीं, बल्कि जीने की अवस्था बन जाती है।
How you want to feel
Life stages
ओम शांति: शांत मन, शांत तन, शांत रहे वातावरण।
ओम शांति: जीवन शांति, जल-थल शांति, पृथ्वी शांति, सृष्टि शांति।
ओम शांति: जब हो शांति की अभिलाषा, आनंद प्रेम है एक ही भाषा।
क्रोध, मोह, अहंकार जो छोड़े, ध्यान-योग से नाता जोड़े।
शांति कोई मंत्र नहीं है, शांति कोई जंत्र नहीं है।
शांति मेरा मन-मंदिर है, शांति मेरा ही अंतर है, ही अंतर है...
ओम शांति… शांति… शांति…।
27 more meditations from this teacher
Same theme and language
Broader matches from the same life stage and language