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2 Feb 1970
“आत्मिक पावर की परख”
2 February 1970 · हिंदी
आज बापदादा हरेक का प्रोजेक्टर शो देख रहे हैं। आप लोग भी प्रोजेक्टर शो रखते हो? प्रोजेक्टर कौन सा है, जिस द्वारा चित्र देखते हो? हरेक के नयन प्रोजेक्टर हैं। इस प्रोजेक्टर द्वारा कौन-सा चित्र दुनिया को दिखला सकते हो? वह है साइंस की शक्ति का प्रोजेक्टर और यह है ईश्वरीय शक्ति का प्रोजेक्टर। जितना-जितना प्रोजेक्टर पावरफुल होता है उतना ही दृश्य क्लीयर देखने में आता है। वैसे ही तुम सभी बच्चों के यह दिव्य नेत्र जितना-जितना क्लीयर अर्थात् रूहानियत से सम्पूर्ण होंगे उतना ही तुम बच्चों के नयनों द्वारा कई चित्र देख सकते हैं। और ऐसे ही स्पष्ट दिखलाई देंगे जैसे प्रोजेक्टर द्वारा स्पष्ट दिखाई देते हैं। तो इन नयनों द्वारा बापदादा और पूरी रचना के स्थूल, सूक्ष्म, मूल तीनों लोकों के चित्र दिखाई दे सकते हैं। कोई भी आपके सामने आये तो सर्व साक्षात्कार तुम्हारे नयनों द्वारा कर सकते हैं। जितनी-जितनी लाइट तेज होगी उतना चित्र क्लीयर। बल्ब पावरफुल कितना है, वह फिर बापदादा कैसे देखते हैं, मालूम है? अपना बल्ब देखा है कि कितने पावर का है? हरेक ने अपने बल्ब की पावर देखी है? जो समझते हैं हम अपनी लाइट की परसेन्टेज को जानते हैं कि हमारा बल्ब किस प्रकार का है, वह हाथ उठायें। हमारी आत्मा कितनी पावरफुल है इसकी परख किस आधार से कर सकते हो? (चार्ट से) वह भी टोटल बात हो गई कौन-सी बात से अपनी परख कर सकते हो? लाइट में विशेषता क्या होती है? उनमें विशेष गुण यह होता है जो चीज़ जैसी है वैसे ही स्पष्ट देखने में आती है। अन्धियारे में जो जैसी वस्तु है वैसे देखने में नहीं आती है। तो लाइट का विशेष गुण है अस्पष्ट को स्पष्ट करना। इस रीति से अपनी लाइट की परसेन्टेज़ परखने का तरीका यही है। एक तो अपने पुरुषार्थ का मार्ग स्पष्ट होगा अर्थात् लाइन क्लीयर देखने में आयेगी। दूसरी बात अपना भविष्य स्टेट्स भी देखने में आयेगा। तीसरी बात जिन्हों की सर्विस करते हो तो जितनी खुद की रोशनी पावरफुल होगी, उन्हों को भी इतना ही सहज और स्पष्ट मार्ग दिखा सकेंगे। वह भी सहज ही अपने पुरुषार्थ में चल पड़ेगा। अपनी मंजिल सहज देखने में आयेगी। जितना लाइट की परसेन्टेज ज्यादा होगी। उतना ही सभी बातों में स्पष्ट देखने में आयेगा। अगर लाइट की परसेन्टेज कम है तो खुद भी पुरुषार्थ में स्पष्ट नहीं होगा और जिसको मार्ग बताते हैं वह भी सहज और स्पष्ट अपने मार्ग और मंजिल को जान नहीं सकेंगे। जिसकी लाइट पावरफुल होगी वह न खुद उलझते न दूसरे को उलझाते हैं। तो अपने पुरुषार्थ अपनी सर्विस से देख सकते हो कि जिन्हों की सर्विस करते हो उन्हों का मार्ग स्पष्ट होता है। अगर मार्ग स्पष्ट नहीं होता है तो अपनी लाइट की परसेन्टेज की कमी है। कई खुद कभी कदम-कदम पर ठोकर खाते हैं और उनकी रचना भी ऐसी होती है। अभी आप एक-एक मास्टर रचयिता हो। तो मास्टर रचयिता अपनी रचना से भी अपने पावर को परख सकते हैं। जैसा बीज होता है वैसा ही फल निकलता है। अगर बीज पावरफुल नहीं होता है तो कहाँ-कहाँ फूल निकलेंगे, फल निकलेंगे लेकिन स्वीकार करने योग्य नहीं होते हैं। जो बहुत सुन्दर वा खुशबूदार होंगे, जो फल अच्छा होगा उनको ही खरीद करेंगे ना। अगर बीज ही पावरफुल नहीं होता है तो रचना भी जो पैदा होती है वह स्वीकार करने योग्य नहीं होती। इसलिए अपने लाइट की परसेन्टेज को बढ़ाओ। दिन प्रतिदिन सभी के मस्तक और नयन ऐसे ही सर्विस करें जैसे आप का प्रोजेक्टर शो सर्विस करता है। कोई भी सामने आयेंगे वह चित्र आपके नयनों में देखेंगे, नयन को देखते ही बुद्धियोग द्वारा अनेक साक्षात्कार होंगे। ऐसे साक्षात्कार मूर्त अपने को बनाना है। लेकिन साक्षात्कार मूर्त वह बन सकेंगे जो सदैव साक्षी स्थिति में स्थित होंगे। उनके नयन प्रोजेक्टर का काम करेंगे। उनका मस्तक सदैव चमकता हुआ दिखाई पड़ेगा। होली के बाद सांग बनाते हैं ना। देवताओं को सजाकर मस्तक में बल्ब जलाते हैं। यह सांग क्यों बनाते हैं? यह किस समय का प्रैक्टिकल रूप है? इस समय का। जो फिर आपके यादगार बनाते आते हैं। तो एक-एक के मस्तक में लाइट देखने आये। विनाश के समय भी यह लाइट रूप आपको बहुत मदद देगी। कोई किस भी वृत्ति वाला आपके सामने आयेंगे। वह इस देह को न देख आपके चमकते हुए इस बल्ब को देखेंगे। जो बहुत तेज लाइट होती है और उसको जब देखने लगते हैं तो दूसरी सारी चीज़ें छिप जाती हैं। वैसे ही जितनी-जितनी आप सभी की लाइट तेज होगी उतना ही उन्हों को आपकी देह देखते हुए भी नहीं देखने आयेगी। जब देह को देखेंगे ही नहीं तो तमोगुणी दृष्टि और वृत्ति स्वत: ही खत्म हो जायेगी। यह परीक्षाएं आनी है। सभी प्रकार की परिस्थितियां पास करनी हैं।
यह जो ग्रुप है इन्हों का हंसी में एक नाम रखा है। आज वतन में चिट-चैट चल रही थी इसी बात पर। कोई ने हंसी में कहा था बड़ी बहनें हमारी हेड्स हैं और हम फिर लेग (टांगे) हैं। तो बापदादा ने फिर नाम रखा है इन्हों के बड़े तो हैं हेड्स। लेकिन यह हैंडिल हैं। मोटर में हैंडिल बिगर काम चल न सके। हैंडिल द्वारा ही मोटर को मोड़ सकते हैं। तो हेड्स भी इन हैंडिल के बिना सर्विस को हैंडिल नहीं कर सकते हैं। यह जो ग्रुप है यह है हैंडिल्स। इनके बिना हेड्स कुछ भी कर नहीं सकते। जो भी आते हैं उनको पहले-पहले हैंडिल करने वाले यह हैंडिल हैं ना। तो आप लोगों के ऊपर इतनी जिम्मेवारी है। अगर आप हैंडिल ठीक नहीं, तो सर्विस की हैंडलिंग भी ठीक नहीं होगी। लेकिन यह सिर्फ देखना हैंडिल तो है लेकिन हेड्स को कभी हैंडिल नहीं करना। हेड का हैंड बन कर रहना। बापदादा के भी राइट हैंड हैं ना, लेफ्ट हैंड भी हैं। राईट हैंड को फुल पावर होती है, लेकिन होता हैंड है। हेड नहीं होता। हैंडिल तो हैं ना। लेकिन कैसे हैंडिल करना है और कैसे बापदादा के राइट हैंड बनें, इसके लिए यहाँ आये हो। यह ग्रुप ऐसा है जो एक-एक कमाल कर सकते हैं। सर्विस को सफलता के रूप में ला सकते हैं। सर्विस में सफलता लाने के लिए दो बातें ध्यान में रखनी हैं। सर्व बातों में सहयोगी तो हो लेकिन सर्विस में सफलता लाने के निमित्त विशेष यह ग्रुप है। इसके लिए दो बातें विशेष ध्यान में रखना है - एक है निशाना पूरा और दूसरा नशा भी पूरा होना। नशा और निशाना यह दो बातें इस ग्रुप में विशेष आनी चाहिए। जब निशाना ठीक होता है तो एक धक से किसको मरजीवा बना सकते हो। जो निशानेबाज होते हैं वह एक ही गोली से ठीक निशाना करते हैं। जिनको निशाना नहीं आता, उनको 3-4 बारी गोली चलानी पड़ती है। अगर अपनी स्थिति का भी निशाना और दूसरे की सर्विस करने का भी निशाना ठीक होगा और साथ-साथ नशा भी सदैव एकरस रहता होगा तो सर्विस में सफलता ज्यादा पा सकते हो। कभी नशा उतर जाता, कभी निशाना छूट जाता, यह दोनों बातें ठीक होनी चाहिए। जिसमें जितना खुद नशा होगा उतना ही निशाना ठीक कर सकेंगे। सर्विसएबुल तो हो लेकिन सर्विस में अब क्या विशेषता लानी है? सर्विसएबुल उनको कहा जाता है जिनका एक सेकेण्ड और एक संकल्प भी बिना सर्विस के ना जाय, हर सेकेण्ड सर्विस के प्रति हो। चाहे अपनी सर्विस चाहे दूसरों की सर्विस। लेकिन जब हो ही सर्विसएबुल, तो समय और संकल्प सर्विस के बिगर नहीं जाना चाहिए। फरमानबरदार का अर्थ ही है फरमान पर चलना। मुख्य फरमान है निरन्तर याद में रहो। अगर इस फरमान पर नहीं चलते तो क्या कहेंगे? जितना-जितना इस फरमान को प्रैक्टिकल में लायेंगे उतना ही प्रत्यक्ष फल मिलेगा। पुरुषार्थ में चलते हुए कौनसा विघ्न देखने में आता हैं, जो सम्पूर्ण होने में रुकावट डालता है? विशेष विघ्न व्यर्थ संकल्पों के रूप में देखा गया है। तो इससे बचने के लिये क्या करना है? एक तो कभी अन्दर की वा बाहर की रेस्ट न लो। अगर रेस्ट में नहीं होंगे तो वेस्ट नहीं जायेगा। और दूसरी बात अपने को सदैव गेस्ट समझो। अगर गेस्ट समझेंगे और रेस्ट नहीं करेंगे तो वेस्ट नहीं जायेगा। चाहे संकल्प, चाहे समय, यह है सहज तरीका। अच्छा अब फिर समाप्ती के दिन सभी के मस्तक के बल्ब कितने पावर के हैं वह देखेंगे। और पावरफुल होंगे तो माया उस पावर के आगे आने का साहस नहीं रखेगी। जितना बल्ब की पावर होती है उतना सामना कोई नहीं कर सकता। ऐसी पावरफुल स्थिति देखेंगे। सर्विसएबुल हो, अब पावरफुल बनो। एक्टिव हो, लेकिन एक्यूरेट बनो। तो इस ग्रुप को विशेष छाप कौन-सा लगना है? एक्यूरेट। कोई भी बात में सदैव एक्यूरेट। चाहे मनसा, चाहे वाचा, चाहे कर्मणा - तीनों में एक्यूरेट। अच्छा!