Command Palette
Search for a command to run...
Loading topic
Brahma Kumaris
Murli
Home
Murli Search
Murli Topics
Murli Chintan
AI Murli Chintan (ChatGPT)
Languages
E
English
ह
हिंदी
ગ
ગુજરાતી
త
తెలుగు
Library
Overview
Favorites
Notes & Highlights
Collections
Tracker
Settings
BKOne
Toggle Sidebar
Brahma Kumaris
Murli
Home
Library
Settings
BKOne
Search
K
Toggle theme
Home
Search
BKOne
Library
Settings
पेपर - Paper - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
Home
Topics
पेपर - Paper
पेपर - Paper
102 unique murli dates in this topic
English
हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
101 murlis in हिंदी
22/01/1969
“बापदादा के हाथ में बुद्धि रूपी हाथ हो तो परीक्षाओं रूपी सागर में हिलेंगे नहीं”
18/05/1969
“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”
26/05/1969
“सम्पूर्ण स्नेही की परख”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
16/10/1969
“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
18/01/1970
“सम्पूर्ण विल करने से विल-पावर की प्राप्ति”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
02/02/1970
“आत्मिक पावर की परख”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
11/06/1970
“विश्वपति बनने की सामग्री”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
05/12/1970
“प्रतिज्ञा करने वालों को माया की चैलेंज”
05/03/1971
“भट्ठी की अलौकिक छाप”
29/04/1971
“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”
11/06/1971
“तीनों लोकों में बापदादा के पास रहने वाले रत्नों की निशानियाँ”
22/06/1971
“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”
27/07/1971
“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”
28/07/1971
“आकार में निराकार को देखने का अभ्यास”
15/09/1971
“मास्टर ज्ञान सूर्य आत्माओं का कर्तव्य”
03/10/1971
“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”
02/02/1972
“प्रीत बुद्धि की निशानियाँ”
28/02/1972
“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”
24/06/1972
“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”
12/07/1972
“मरजीवापन की स्मृति से गृहस्थी वा प्रवृत्ति की विस्मृति”
18/07/1972
“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”
06/08/1972
“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”
19/09/1972
“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”
12/11/1972
“अलौकिक कर्म करने की कला”
23/01/1973
“सम्पूर्ण मूर्त बनने के चार स्तम्भ”
23/06/1973
“अलौकिक खजाने के मालिक”
15/04/1974
“विघ्न-विनाशक बनकर अंगद समान माया पर विजय प्राप्त करो”
08/02/1975
“निश्चय रूपी आसन पर अचल स्थिति”
03/08/1975
“शिव शक्ति व पाण्डव सेना को तैयार होने के लिए सावधानी”
01/09/1975
“समीप और समान, महीन और महान”
02/09/1975
“दिल रूपी तख्त-नशीन ही सतयुगी विश्व के राज्य का अधिकारी”
13/09/1975
“विश्व-परिवर्तन ही ब्राह्मण जीवन का विशेष कर्तव्य है”
07/02/1976
“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”
14/04/1977
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
09/05/1977
“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
16/05/1977
“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
18/06/1977
“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”
22/06/1977
“सितारों की दुनिया का रहस्य”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
29/11/1978
“सन्तुष्टता से प्रसन्नता और प्रशंसा की प्राप्ति”
01/12/1978
“सर्व खजानों की चाबी - एकनामी बनना”
18/01/1979
“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”
05/12/1979
“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”
14/01/1980
“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
06/02/1980
“अशरीरी बनने की सहज विधि”
07/02/1980
“विचित्र राज्य दरबार”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
02/05/1982
“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”
10/11/1983
“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”
16/03/1986
“रुहानी ड्रिल”
07/04/1986
“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
25/10/1987
“चार बातों से न्यारे बनो”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
30/01/1988
“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
19/11/1989
“तन, मन, धन और जन का भाग्य”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
10/04/1991
“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
26/02/1995
“संगमयुग उत्सव का युग है - उत्सव मनाना अर्थात् अविनाशी उमंग-उत्साह में रहना”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
04/12/1995
“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”
16/02/1996
“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/02/2000
“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”
16/12/2000
“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”
20/02/2001
“शिव जयन्ती, व्रत लेने और सर्व समर्पण होने का यादगार है''
15/12/2001
“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
18/01/2003
“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
25/03/2005
“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''
30/11/2005
“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
15/12/2006
“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''