पेपर - Paper
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101 murlis in हिंदी
22/01/1969“बापदादा के हाथ में बुद्धि रूपी हाथ हो तो परीक्षाओं रूपी सागर में हिलेंगे नहीं”18/05/1969“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”26/05/1969“सम्पूर्ण स्नेही की परख”28/09/1969“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”18/01/1970“सम्पूर्ण विल करने से विल-पावर की प्राप्ति”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”02/02/1970“आत्मिक पावर की परख”26/03/1970“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”28/05/1970“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”11/06/1970“विश्वपति बनने की सामग्री”22/10/1970“फुल की निशानी - फ्लोलेस”05/12/1970“प्रतिज्ञा करने वालों को माया की चैलेंज”05/03/1971“भट्ठी की अलौकिक छाप”29/04/1971“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”11/06/1971“तीनों लोकों में बापदादा के पास रहने वाले रत्नों की निशानियाँ”22/06/1971“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”27/07/1971“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”28/07/1971“आकार में निराकार को देखने का अभ्यास”15/09/1971“मास्टर ज्ञान सूर्य आत्माओं का कर्तव्य”03/10/1971“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”02/02/1972“प्रीत बुद्धि की निशानियाँ”28/02/1972“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”24/06/1972“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”12/07/1972“मरजीवापन की स्मृति से गृहस्थी वा प्रवृत्ति की विस्मृति”18/07/1972“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”06/08/1972“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”19/09/1972“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”12/11/1972“अलौकिक कर्म करने की कला”23/01/1973“सम्पूर्ण मूर्त बनने के चार स्तम्भ”23/06/1973“अलौकिक खजाने के मालिक”15/04/1974“विघ्न-विनाशक बनकर अंगद समान माया पर विजय प्राप्त करो”08/02/1975“निश्चय रूपी आसन पर अचल स्थिति”03/08/1975“शिव शक्ति व पाण्डव सेना को तैयार होने के लिए सावधानी”01/09/1975“समीप और समान, महीन और महान”02/09/1975“दिल रूपी तख्त-नशीन ही सतयुगी विश्व के राज्य का अधिकारी”13/09/1975“विश्व-परिवर्तन ही ब्राह्मण जीवन का विशेष कर्तव्य है”07/02/1976“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”14/04/1977“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”30/04/1977“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”09/05/1977“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”16/05/1977“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”18/06/1977“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”22/06/1977“सितारों की दुनिया का रहस्य”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”29/11/1978“सन्तुष्टता से प्रसन्नता और प्रशंसा की प्राप्ति”01/12/1978“सर्व खजानों की चाबी - एकनामी बनना”18/01/1979“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”05/12/1979“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”14/01/1980“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”23/01/1980“पवित्रता का महत्व”06/02/1980“अशरीरी बनने की सहज विधि”07/02/1980“विचित्र राज्य दरबार”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”02/05/1982“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”10/11/1983“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”16/03/1986“रुहानी ड्रिल”07/04/1986“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”14/10/1987“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”25/10/1987“चार बातों से न्यारे बनो”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”27/12/1987“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”30/01/1988“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”04/12/1991“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”26/02/1995“संगमयुग उत्सव का युग है - उत्सव मनाना अर्थात् अविनाशी उमंग-उत्साह में रहना”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”04/12/1995“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”16/02/1996“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”15/02/2000“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”16/12/2000“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”20/02/2001“शिव जयन्ती, व्रत लेने और सर्व समर्पण होने का यादगार है''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''18/01/2003“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''25/03/2005“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''30/11/2005“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”15/12/2006“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''
