तीन बात - Three thing
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06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”13/03/1969“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”17/05/1969“जादू मंत्र का दर्पण”18/05/1969“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”13/11/1969“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”06/12/1969“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”02/02/1970“आत्मिक पावर की परख”23/03/1970“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”14/05/1970“समर्पण का गुह्य अर्थ”21/05/1970“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”07/06/1970“दिव्य मूर्त बनने की विधि”11/06/1970“विश्वपति बनने की सामग्री”19/06/1970“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”25/06/1970“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”26/06/1970“कामधेनु का अर्थ”11/07/1970“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”30/07/1970“महारथी अर्थात् महानता”22/10/1970“फुल की निशानी - फ्लोलेस”18/01/1971“अव्यक्त स्थिति द्वारा सेवा”22/01/1971“दिलतख्त नशीन आत्मा की निशानी”05/03/1971“भट्ठी की अलौकिक छाप”19/04/1971“त्याग, तपस्या और सेवा की परिभाषा”06/05/1971“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”10/06/1971“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”18/07/1971“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”19/07/1971“सिम्पल बनो, सैम्पल बनो”28/07/1971“आकार में निराकार को देखने का अभ्यास”25/08/1971“मुख्य 7 कमजोरियां और उसको मिटाने के लिए 7 दिन का कोर्स”11/09/1971“डबल रिफाइन स्टेज”15/09/1971“मास्टर ज्ञान सूर्य आत्माओं का कर्तव्य”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”27/02/1972“होलीहंस बनने का यादगार - होली”12/03/1972“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”27/04/1972“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”24/06/1972“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”16/07/1972“स्वच्छ और आत्मिक बल वाली आत्मा ही आकर्षणमूर्त है”19/07/1972“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”02/08/1972“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”09/11/1972“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”04/05/1973“अधिकारी और अधीन”30/05/1973“संगमयुग - पुरुषोत्तम युग”06/06/1973“समानता और समीपता”23/06/1973“अलौकिक खजाने के मालिक”21/07/1973“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”02/08/1973“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”24/04/1974“त्रिमूर्ति लाइट के साक्षात्कार-मूर्त बनने की डेट फिक्स करो”23/05/1974“हद की आकर्षणों या विभूतियों से परे रहने वाला ही सच्चा वैष्णव”21/06/1974“महान् पद की बुकिंग के लिये महीन रूप से चेकिंग आवश्यक”26/06/1974“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”30/06/1974“अव्यक्त स्थिति में स्थित होने से पुरुषार्थ की गति में तीव्रता”11/07/1974“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”14/07/1974“बाप समान सफलता-मूर्त बनने का साधन - सर्व के प्रति शुभ भावना”18/07/1974“सम्पूर्ण पवित्र वृत्ति और दृष्टि से श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”09/01/1975“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”29/01/1975“परखने की शक्ति के प्रयोग से सफलता”02/02/1975“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”10/02/1975“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”02/09/1975“दिल रूपी तख्त-नशीन ही सतयुगी विश्व के राज्य का अधिकारी”06/09/1975“तीन कम्बाइन्ड स्वरूप”19/09/1975“शक्तियों एवं पाण्डवों की विशेषतायें”27/09/1975“बेहद का वैरागी, त्यागी और सेवाधारी ही विश्व-महाराजन्”30/09/1975“सारे कल्प में विशेष पार्ट बजाने वाली श्रेष्ठ आत्माओं की विशेषतायें”07/10/1975“सर्व अधिकार और बेहद के वैराग्य वाला ही राजऋषि”20/10/1975“परहेज द्वारा संगमयुग के सर्व सुखों की अनुभूति”23/10/1975“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”26/10/1975“विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म”27/10/1975“क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन से पुरुषार्थ में ढीलापन”08/12/1975“बच्चे की विभिन्न स्टेजेस”27/01/1976“तीन श्रेष्ठ ईश्वरीय वरदान”28/01/1976“रूहानी सितारों की महफिल”01/02/1976“रूहानी शमा और तीन प्रकार के रूहानी परवाने”02/02/1976“भक्तों और पाण्डवों का पोतामेल”07/02/1976“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”08/02/1976“कनेक्शन और करेक्शन के बैलेन्स से कमाल”05/01/1977“त्यागी और तपस्वी बच्चे सदा पास हैं”10/01/1977“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”16/01/1977“सन्तुष्ट आत्मा ही अनेक आत्माओं का इष्ट बन सकती है”18/01/1977“18 जनवरी का विशेष महत्व”23/01/1977“महीनता ही महानता है”26/01/1977“अन्तर्मुखता द्वारा सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव”05/02/1977“महानता के आधार”16/04/1977“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”30/04/1977“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”05/05/1977“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”09/05/1977“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”14/06/1977“देश और विदेश का सैर-समाचार”22/06/1977“सितारों की दुनिया का रहस्य”25/06/1977“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”28/06/1977“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”29/11/1978“सन्तुष्टता से प्रसन्नता और प्रशंसा की प्राप्ति”12/12/1978“परोपकारी कैसे बनें?”02/01/1979“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”18/01/1979“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”30/01/1979“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”05/12/1979“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”26/12/1979“राजयोगी अर्थात् त्रि-स्मृति स्वरूप”04/01/1980“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”18/01/1980“स्मृति दिवस पर बापदादा की बच्चों प्रति शिक्षायें”30/01/1980“स्नेह, सहयोग और शक्ति स्वरूप के पेपर्स की चेकिंग और रिजल्ट”07/02/1980“विचित्र राज्य दरबार”09/03/1981“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”17/03/1981“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”20/01/1982“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”07/03/1982“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”13/04/1982“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”25/12/1982“विधि, विधान और वरदान”15/01/1983“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”15/02/1983“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”27/03/1983“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”13/04/1983“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”14/04/1983“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”23/05/1983“छोड़ो तो छूटो!”10/11/1983“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”14/12/1983“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”19/12/1983“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”27/12/1983“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”20/01/1984“महादानी बनो, वरदानी बनो”26/02/1984“बापदादा की अद्भुत चित्रशाला”12/03/1984“सन्तुष्टता”15/04/1984“स्नेही, सहयोगी, शक्तिशाली बच्चों की तीन अवस्थाएं”17/04/1984“पद्मापद्म भाग्यशाली की निशानी”26/08/1984“लक्ष्य प्रमाण सफलता प्राप्त करने के लिए स्वार्थ के बजाए सेवा अर्थ कार्य करो”03/12/1984“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”10/12/1984“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”17/12/1984“व्यर्थ को समाप्त करने का साधन - समर्थ संकल्पों का खजाना ज्ञान मुरली”09/01/1985“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”18/01/1985“प्रतिज्ञा द्वारा प्रत्यक्षता (स्मृति दिवस पर विशेष)”28/01/1985“विश्व सेवा का सहज साधन मन्सा सेवा”06/03/1985“होली का रूहानी रहस्य”30/03/1985“तीन-तीन बातों का पाठ”20/02/1986“उड़ती कला से सर्व का भला”13/03/1986“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”27/03/1986“सदा के स्नेही बनो”31/12/1986“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”18/03/1987“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”29/10/1987“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”23/12/1987“मनन शक्ति और मगन स्थिति”27/12/1987“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”31/12/1987“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”14/01/1988“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”12/03/1988“तीन प्रकार का स्नेह तथा दिल के स्नेही बच्चों की विशेषतायें”31/03/1988‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम05/12/1989“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”06/01/1990“होलीहँस की परिभाषा”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”13/12/1990“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”31/12/1990“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”09/01/1993“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”31/12/1993“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”03/04/1994“सन्तुष्टता का आधार - सम्बन्ध, सम्पत्ति और सेहत (तन्दुरुस्ती)”17/11/1994“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”14/12/1994“समय, संकल्प, बोल द्वारा कमाई जमा करने का आधार - तीन बिन्दी लगाना”18/01/1995“ज्ञान सरोवर उद्घाटन के शुभ मुहूर्त पर अव्यक्त बापदादा के मधुर महावाक्य (सुबह 11.00 बजे)”31/03/1995“परमात्म मिलन मेले की सौगात - ताज, तख्त और तिलक”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”27/02/1996“सत्यता का फाउण्डेशन है पवित्रता और निशानी है - चलन वा चेहरे में दिव्यता”18/01/1997“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”06/03/1997“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”21/11/1998“सेवा के साथ देह में रहते विदेही अवस्था का अनुभव बढ़ाओ”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”31/12/1998“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”30/03/1999“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”11/11/2000“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”18/01/2002“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”18/01/2003“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''15/12/2003“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''02/02/2004“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''17/02/2004“शिवरात्रि जन्म उत्सव का विशेष स्लोगन - सर्व को सहयोग दो और सहयोगी बनाओ, सदा अखण्ड भण्डारा चलता रहे''05/03/2004“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''15/10/2004“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''15/12/2004“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''
