Command Palette
Search for a command to run...
Loading topic
तीन बात - Three thing - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
Home
Topics
तीन बात - Three thing
तीन बात - Three thing
217 unique murli dates in this topic
English
हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
200 murlis in हिंदी
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
13/03/1969
“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”
17/05/1969
“जादू मंत्र का दर्पण”
18/05/1969
“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”
13/11/1969
“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
06/12/1969
“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
02/02/1970
“आत्मिक पावर की परख”
23/03/1970
“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”
14/05/1970
“समर्पण का गुह्य अर्थ”
21/05/1970
“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
11/06/1970
“विश्वपति बनने की सामग्री”
19/06/1970
“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
26/06/1970
“कामधेनु का अर्थ”
11/07/1970
“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”
30/07/1970
“महारथी अर्थात् महानता”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
18/01/1971
“अव्यक्त स्थिति द्वारा सेवा”
22/01/1971
“दिलतख्त नशीन आत्मा की निशानी”
05/03/1971
“भट्ठी की अलौकिक छाप”
19/04/1971
“त्याग, तपस्या और सेवा की परिभाषा”
06/05/1971
“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”
10/06/1971
“सेवा की धरनी तैयार करने का साधन - सर्चलाइट”
18/07/1971
“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”
19/07/1971
“सिम्पल बनो, सैम्पल बनो”
28/07/1971
“आकार में निराकार को देखने का अभ्यास”
25/08/1971
“मुख्य 7 कमजोरियां और उसको मिटाने के लिए 7 दिन का कोर्स”
11/09/1971
“डबल रिफाइन स्टेज”
15/09/1971
“मास्टर ज्ञान सूर्य आत्माओं का कर्तव्य”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
27/02/1972
“होलीहंस बनने का यादगार - होली”
12/03/1972
“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”
27/04/1972
“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
24/06/1972
“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”
16/07/1972
“स्वच्छ और आत्मिक बल वाली आत्मा ही आकर्षणमूर्त है”
19/07/1972
“संगठन का महत्व तथा संगठन द्वारा सर्टीफिकेट”
02/08/1972
“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”
09/11/1972
“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”
04/05/1973
“अधिकारी और अधीन”
30/05/1973
“संगमयुग - पुरुषोत्तम युग”
06/06/1973
“समानता और समीपता”
23/06/1973
“अलौकिक खजाने के मालिक”
21/07/1973
“रूहानी जज़ और जिस्मानी जज़”
02/08/1973
“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”
24/04/1974
“त्रिमूर्ति लाइट के साक्षात्कार-मूर्त बनने की डेट फिक्स करो”
23/05/1974
“हद की आकर्षणों या विभूतियों से परे रहने वाला ही सच्चा वैष्णव”
21/06/1974
“महान् पद की बुकिंग के लिये महीन रूप से चेकिंग आवश्यक”
26/06/1974
“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”
30/06/1974
“अव्यक्त स्थिति में स्थित होने से पुरुषार्थ की गति में तीव्रता”
11/07/1974
“मुरली में दी गई डायरेक्शन से ही सर्व कमियों से छुटकारा”
14/07/1974
“बाप समान सफलता-मूर्त बनने का साधन - सर्व के प्रति शुभ भावना”
18/07/1974
“सम्पूर्ण पवित्र वृत्ति और दृष्टि से श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”
09/01/1975
“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”
29/01/1975
“परखने की शक्ति के प्रयोग से सफलता”
02/02/1975
“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”
10/02/1975
“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”
02/09/1975
“दिल रूपी तख्त-नशीन ही सतयुगी विश्व के राज्य का अधिकारी”
06/09/1975
“तीन कम्बाइन्ड स्वरूप”
19/09/1975
“शक्तियों एवं पाण्डवों की विशेषतायें”
27/09/1975
“बेहद का वैरागी, त्यागी और सेवाधारी ही विश्व-महाराजन्”
30/09/1975
“सारे कल्प में विशेष पार्ट बजाने वाली श्रेष्ठ आत्माओं की विशेषतायें”
07/10/1975
“सर्व अधिकार और बेहद के वैराग्य वाला ही राजऋषि”
20/10/1975
“परहेज द्वारा संगमयुग के सर्व सुखों की अनुभूति”
23/10/1975
“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”
26/10/1975
“विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म”
27/10/1975
“क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन से पुरुषार्थ में ढीलापन”
08/12/1975
“बच्चे की विभिन्न स्टेजेस”
27/01/1976
“तीन श्रेष्ठ ईश्वरीय वरदान”
28/01/1976
“रूहानी सितारों की महफिल”
01/02/1976
“रूहानी शमा और तीन प्रकार के रूहानी परवाने”
02/02/1976
“भक्तों और पाण्डवों का पोतामेल”
07/02/1976
“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”
08/02/1976
“कनेक्शन और करेक्शन के बैलेन्स से कमाल”
05/01/1977
“त्यागी और तपस्वी बच्चे सदा पास हैं”
10/01/1977
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
16/01/1977
“सन्तुष्ट आत्मा ही अनेक आत्माओं का इष्ट बन सकती है”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
23/01/1977
“महीनता ही महानता है”
26/01/1977
“अन्तर्मुखता द्वारा सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव”
05/02/1977
“महानता के आधार”
16/04/1977
“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
09/05/1977
“सम्पूर्ण पवित्रता ही विशेष पार्ट बजाने वालों का श्रृंगार है”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
14/06/1977
“देश और विदेश का सैर-समाचार”
22/06/1977
“सितारों की दुनिया का रहस्य”
25/06/1977
“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”
28/06/1977
“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”
29/11/1978
“सन्तुष्टता से प्रसन्नता और प्रशंसा की प्राप्ति”
12/12/1978
“परोपकारी कैसे बनें?”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
18/01/1979
“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”
30/01/1979
“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”
05/12/1979
“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”
26/12/1979
“राजयोगी अर्थात् त्रि-स्मृति स्वरूप”
04/01/1980
“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”
18/01/1980
“स्मृति दिवस पर बापदादा की बच्चों प्रति शिक्षायें”
30/01/1980
“स्नेह, सहयोग और शक्ति स्वरूप के पेपर्स की चेकिंग और रिजल्ट”
07/02/1980
“विचित्र राज्य दरबार”
09/03/1981
“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”
17/03/1981
“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
20/01/1982
“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”
07/03/1982
“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”
13/04/1982
“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”
25/12/1982
“विधि, विधान और वरदान”
15/01/1983
“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”
15/02/1983
“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”
27/03/1983
“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
14/04/1983
“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
10/11/1983
“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”
14/12/1983
“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”
19/12/1983
“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”
27/12/1983
“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”
20/01/1984
“महादानी बनो, वरदानी बनो”
26/02/1984
“बापदादा की अद्भुत चित्रशाला”
12/03/1984
“सन्तुष्टता”
15/04/1984
“स्नेही, सहयोगी, शक्तिशाली बच्चों की तीन अवस्थाएं”
17/04/1984
“पद्मापद्म भाग्यशाली की निशानी”
26/08/1984
“लक्ष्य प्रमाण सफलता प्राप्त करने के लिए स्वार्थ के बजाए सेवा अर्थ कार्य करो”
03/12/1984
“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”
10/12/1984
“पुराने खाते की समाप्ति की निशानी”
17/12/1984
“व्यर्थ को समाप्त करने का साधन - समर्थ संकल्पों का खजाना ज्ञान मुरली”
09/01/1985
“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”
18/01/1985
“प्रतिज्ञा द्वारा प्रत्यक्षता (स्मृति दिवस पर विशेष)”
28/01/1985
“विश्व सेवा का सहज साधन मन्सा सेवा”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
13/03/1986
“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”
27/03/1986
“सदा के स्नेही बनो”
31/12/1986
“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
29/10/1987
“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
23/12/1987
“मनन शक्ति और मगन स्थिति”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
12/03/1988
“तीन प्रकार का स्नेह तथा दिल के स्नेही बच्चों की विशेषतायें”
31/03/1988
‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
06/01/1990
“होलीहँस की परिभाषा”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
13/12/1990
“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
31/12/1993
“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
03/04/1994
“सन्तुष्टता का आधार - सम्बन्ध, सम्पत्ति और सेहत (तन्दुरुस्ती)”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
14/12/1994
“समय, संकल्प, बोल द्वारा कमाई जमा करने का आधार - तीन बिन्दी लगाना”
18/01/1995
“ज्ञान सरोवर उद्घाटन के शुभ मुहूर्त पर अव्यक्त बापदादा के मधुर महावाक्य (सुबह 11.00 बजे)”
31/03/1995
“परमात्म मिलन मेले की सौगात - ताज, तख्त और तिलक”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
27/02/1996
“सत्यता का फाउण्डेशन है पवित्रता और निशानी है - चलन वा चेहरे में दिव्यता”
18/01/1997
“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
06/03/1997
“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
21/11/1998
“सेवा के साथ देह में रहते विदेही अवस्था का अनुभव बढ़ाओ”
12/12/1998
“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”
31/12/1998
“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”
13/02/1999
“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”
30/03/1999
“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
11/11/2000
“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”
18/01/2002
“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
18/01/2003
“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
15/12/2003
“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''
02/02/2004
“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''
17/02/2004
“शिवरात्रि जन्म उत्सव का विशेष स्लोगन - सर्व को सहयोग दो और सहयोगी बनाओ, सदा अखण्ड भण्डारा चलता रहे''
05/03/2004
“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''
15/10/2004
“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''
15/12/2004
“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''
Brahma Kumaris
Murli
Home
Murli Search
Murli Topics
Murli Chintan
AI Murli Chintan (ChatGPT)
Languages
E
English
ह
हिंदी
ગ
ગુજરાતી
త
తెలుగు
Library
Overview
Favorites
Notes & Highlights
Collections
Tracker
Settings
BKOne
Toggle Sidebar
Brahma Kumaris
Murli
Home
Library
Settings
BKOne
Search
K
Toggle theme
Home
Search
BKOne
Library
Settings