Obstacles-विघ्न
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02/02/1969“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”26/06/1969“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”25/10/1969“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”02/02/1970“आत्मिक पावर की परख”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”01/03/1971“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”27/07/1971“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”03/10/1971“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”27/04/1972“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”10/05/1972“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”11/07/1972“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”12/11/1972“अलौकिक कर्म करने की कला”24/12/1972“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”01/06/1973“सर्व शक्तियों का स्टॉक”18/06/1973“विशेष आत्माओं की विशेषता”15/04/1974“विघ्न-विनाशक बनकर अंगद समान माया पर विजय प्राप्त करो”26/01/1977“अन्तर्मुखता द्वारा सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव”28/04/1977“सदा सुहागिन की निशानियाँ”29/05/1977“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”16/06/1977“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”28/06/1977“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”30/11/1979“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”01/11/1981“सेवा के सफलता की कुन्जी”04/01/1982“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”13/04/1982“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”26/01/1983“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”21/02/1983“शान्ति की शक्ति”03/12/1983“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”14/01/1984“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”24/02/1984“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”31/12/1984“नये ज्ञान और नई जीवन द्वारा नवीनता की झलक दिखाओ”23/01/1985“दिव्य जन्म की गिफ्ट - दिव्य नेत्र”21/03/1985“स्वदर्शन चक्र से विजय चक्र की प्राप्ति”22/02/1986“रूहानी सेवा - निस्वार्थ सेवा”22/03/1986“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”25/10/1987“चार बातों से न्यारे बनो”27/11/1989“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”31/12/1995“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”03/04/1996“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”30/11/2007“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”15/12/2007“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”
