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Obstacles-विघ्न - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Obstacles-विघ्न
Obstacles-विघ्न
72 unique murli dates in this topic
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71 murlis in हिंदी
02/02/1969
“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”
26/06/1969
“शिक्षा देने का स्वरूप - अपने स्वरूप से शिक्षा देना”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
02/02/1970
“आत्मिक पावर की परख”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
01/03/1971
“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”
27/07/1971
“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”
03/10/1971
“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
27/04/1972
“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”
10/05/1972
“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
11/07/1972
“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”
12/11/1972
“अलौकिक कर्म करने की कला”
24/12/1972
“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”
01/06/1973
“सर्व शक्तियों का स्टॉक”
18/06/1973
“विशेष आत्माओं की विशेषता”
15/04/1974
“विघ्न-विनाशक बनकर अंगद समान माया पर विजय प्राप्त करो”
26/01/1977
“अन्तर्मुखता द्वारा सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
29/05/1977
“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
16/06/1977
“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
28/06/1977
“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”
30/11/1979
“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”
01/11/1981
“सेवा के सफलता की कुन्जी”
04/01/1982
“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”
13/04/1982
“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”
26/01/1983
“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”
21/02/1983
“शान्ति की शक्ति”
03/12/1983
“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”
14/01/1984
“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”
24/02/1984
“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”
31/12/1984
“नये ज्ञान और नई जीवन द्वारा नवीनता की झलक दिखाओ”
23/01/1985
“दिव्य जन्म की गिफ्ट - दिव्य नेत्र”
21/03/1985
“स्वदर्शन चक्र से विजय चक्र की प्राप्ति”
22/02/1986
“रूहानी सेवा - निस्वार्थ सेवा”
22/03/1986
“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
25/10/1987
“चार बातों से न्यारे बनो”
27/11/1989
“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
31/12/1995
“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”
03/04/1996
“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
31/01/1998
“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”
30/03/1998
“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
30/11/2007
“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”
15/12/2007
“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”