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ज्ञानी और अज्ञानी / लौकिक और आलौकिक / दुनियावालो और ब्राह्मण - Knowledgeful / Ignorant Lokik & Alokik Worldly & brahmins - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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ज्ञानी और अज्ञानी / लौकिक और आलौकिक / दुनियावालो और ब्राह्मण - Knowledgeful / Ignorant Lokik & Alokik Worldly & brahmins
ज्ञानी और अज्ञानी / लौकिक और आलौकिक / दुनियावालो और ब्राह्मण - Knowledgeful / Ignorant Lokik & Alokik Worldly & brahmins
137 unique murli dates in this topic
English
हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
137 murlis in हिंदी
04/03/1969
“जो बीता उसे हो ली करना ही होली मनाना है”
18/05/1969
“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
15/09/1969
“याद के आधार पर यादगार”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
06/12/1969
“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
02/02/1970
“आत्मिक पावर की परख”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
29/10/1970
“दीपमाला का सच्चा रहस्य”
18/10/1971
“दीपमाला - चैतन्य दीपकों की माला की यादगार”
27/05/1972
“रावण से विमुख और बाप के सम्मुख रहो”
12/06/1972
“रिफाइन स्थिति की पहचान”
11/07/1972
“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”
12/07/1972
“मरजीवापन की स्मृति से गृहस्थी वा प्रवृत्ति की विस्मृति”
22/07/1972
“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”
02/08/1972
“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”
22/11/1972
“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”
24/04/1973
“अलौकिक जन्म-पत्री”
18/06/1973
“विशेष आत्माओं की विशेषता”
08/07/1973
“समय की पुकार”
24/04/1974
“त्रिमूर्ति लाइट के साक्षात्कार-मूर्त बनने की डेट फिक्स करो”
24/06/1974
“राजयोगी ही विश्व-राज्य के अधिकारी”
26/06/1974
“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”
23/01/1977
“महीनता ही महानता है”
31/01/1977
“भक्तों को सर्व प्राप्ति कराने का आधार है - इच्छा मात्रम् अविद्या की स्थिति”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
24/05/1977
“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
10/06/1977
“मन्त्र और यन्त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
02/01/1978
“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”
23/01/1979
“सदा सुहागिन ही सदा सम्पन्न है”
01/02/1979
“मनन-शक्ति ही माया जीत बनने का साधन”
19/11/1979
“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”
09/01/1980
“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”
06/02/1980
“अशरीरी बनने की सहज विधि”
09/10/1981
“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”
14/01/1982
“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”
14/04/1983
“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”
05/12/1983
“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”
18/02/1984
“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”
04/04/1984
“संगमयुग की श्रेष्ठ वेला, श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की वेला”
16/01/1985
“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”
24/02/1985
“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”
20/01/1986
“पुरुषार्थ और परिवर्तन के गोल्डन चांस का वर्ष”
10/03/1986
“बेफिकर बादशाह बनने की युक्ति”
13/03/1986
“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”
22/03/1986
“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”
25/03/1986
“होली का रहस्य”
10/12/1987
“तन, मन, धन और सम्बन्ध का श्रेष्ठ सौदा”
23/12/1987
“मनन शक्ति और मगन स्थिति”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
18/01/1988
“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”
22/01/1988
“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”
30/01/1988
“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”
16/02/1988
“सदा उत्साह में रहकर उत्सव मनाओ”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
07/03/1988
“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
29/12/1989
“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”
31/12/1989
“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
20/01/1990
“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
13/03/1990
“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
18/01/1991
“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
25/02/1991
“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
26/10/1991
“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”
11/12/1991
“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
18/01/1992
“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”
13/02/1992
“अनेक जन्म का प्यार सम्पन्न जीवन बनाने का आधार - इस जन्म का परमात्म-प्यार”
02/03/1992
“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
18/11/1993
“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
01/02/1994
“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”
18/02/1994
“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”
03/04/1994
“सन्तुष्टता का आधार - सम्बन्ध, सम्पत्ति और सेहत (तन्दुरुस्ती)”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
31/03/1995
“परमात्म मिलन मेले की सौगात - ताज, तख्त और तिलक”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
04/12/1995
“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”
31/12/1995
“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”
18/01/1996
“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”
06/03/1997
“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
30/11/1999
“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
15/12/2003
“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''
02/02/2004
“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''
05/03/2008
“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”
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